Wednesday, 15 June 2016

नीला आशमा सो गया ...

जब कभी में तन्हा होता हु , अनंत की यादे और बाते , 

मेरे झहेनमे गूंजती है... 

कुछ बाते उसने तब कही थी ,

जब हम आधी रातके बाद उस महोल्ले वाले खंडर में मिलते थे.

और कुछ बाते उसी फटे पुराने कागझो में लिखी है . 

उसने जीवनमे जो जो जब कभी भी महेसुस किया ... 

बस वो सब फटे पुराने कागझोमे लिख दिया ... 

और एक दिन वो बिना कहे पूछे बताये कही दूर दूर चल दिया ...  

अब जब कभी में तन्हा होता हु ,

बस उसी फटे पुराने कागझोको लेके बैठ जाता हु . 

और मेरी तन्हाई दूर हो जाती है ... 

और ये आँखे अब छोड़ो भी ...  

अनंत ने बर्षो पहले हाले दिल यु बया किया था 

इन आँखों का क्या है,  ये तो अकसर बहेती रहेती है. 
"अनंत" फिर ये आंखे आंसु भरी कहानी कहेती रहेती है . 

बस इसी तरहा अनंत की बाते याद करते करते 

 मेरी रात कट जाती हे ...

आज मुझे जो कागजका टुकड़ा मिला है .   
उसमे मेरे यार  "अनंत" ने लिखा हे . 

की ,,, 

कभी कभी कुछ पलमें भी ! बहोत कुछ हो जाता है ! 

ये कुछ क्षण बड़ी अजीब-ओ- अलौकिक होती है . 

जब कभी ,  
कुछ पल के लिए भी ! 
हां कुछ ही क्षण के लिए भी ..!
जब कभी, 
कोई हमारे सामने आता है , 
और आते ही वो रूह को हमारी छु जाता है ,
उनका जरासा कुछ बोलना हमें अच्छा लगता है ,  
उनकी आँखे अजीब होती है ..
देखते ही हम उनमे डूबने लगते है ... 
और उनकी और हम खींचने लगते है ... 
ये खिंचाव बड़ा अजीब होता है .  
कुछ ही पलके लिए मुलाकते होती है ...
कुछ ही पलके लिए उनसे जो बाते होती है ..
बस इस कुछ पलमें भी ! फिर बहोत कुछ हो जाता है .
जाने क्या हो जाता है उस पलमें हमें पता तक नहीं चलता .. 
और जब पता चलने लगता हे तब ..!!! 
अब क्या बताऊ तब तक बड़ी देर हो जाती है ...   
और फिर जेसे अचानक वो जीवनमे आते  है ,
ऐसे ही अचानक वो  दूर चला जाते है , 
बस इक छोटीसी मुलाक़ात ... 
जरासी बात ...  
रूह को छु जाती है ... 
और फिर जरासा  जरासा नहीं रहेता ... 
ना छोटी छोटी बाते छोटी रहेती है ... 
वही जरासी बाते ... 
वही छोटीसी मुलाकाते ... 
फिर लंबी कहानी कहेती है ... 
लोग सुनते रहेते हे .
लोग सोचते रहेते हे .
और कोई कर भी क्या शकता है ,  
बस इस पलमे एक पल के लीये ही रूह को छु ने  के बाद , 
जब वो हमसे दूर जाए है ... 
उनकी बहोत सारी याद पास आये है...  
तब जाके दिलको बड़ी तकलीफ होती हे , 
मन उदास उदास और बैचेनसा हो जाता है .. 
कुछ अधुरा अधुरा सा लगता है.. . 
एक पल किसीसे मिलके बिछड़ ने के बाद जब ऐसा  होता हे .. 
तब ऐसा लगता है , ऐसा महेसुस होता है की,  
जैसे उनसे हमारा रिश्ता कुछ एक बस इक इस पलका  ही नहीं !  
बल्की युगो पुराना उनसे हमारा कोई नाता है....  
हां ऐसा होता है , ऐसा ही तो होता है ... 
वर्ना में भला क्यों ... ?
बे वजे रोऊ तरसु  तडपु यु तन्हाई में  उनके लिए ..?  
"अनंत" 

बर्षो पहेले लिखते लिखते थक जाने के बाद 
अनंत कुछ यु कहता था !
लो फिर आज और एक रात सुधर गई मेरी .. 
 "अनंत" लिखते लिखते रात गुजर गई मेरी ... 

ब्लास्ट :- 

चाहत और महोब्बत कभी पुरानी होती ही नहीं ...! 
"अनंत" अकसर लोग ही नए पुराने होते रहेते है ..! 

"अनंत"




1 comment:

  1. સંબંધોની નનામીએ મારી અંતિમ યાત્રા નીકળતી હતી,

    સાવ કાન્હાના મોરપિંછ સમી હલકી ફુલકી હુ તો હતી,

    તોંય આ હટ્ટા કટ્ટા સંબંધો ભાર ઉચકવા અસમર્થ હતા,

    જીવંત દેહને ના સંભાળી શકતા, એ સૌ હવે,

    નાશ્વંત સંબંધને આમ કાંધે ઉચકી રહ્યા હતા !

    હુ અસમજણ સાથે સહઆશ્ચર્યથી જોતી રહી.

    આ ડાઘુઓને જીવંતતાનો ભાર ના લાગ્યો

    ને મૃત અવસ્થાનો ભાર કેમ લાગી રહ્યો હશે...!

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