Friday, 18 January 2013






प्रिये... जब "अनंत" और "अज्ञानी" की कोई बात ना करेंगे.. जब हमें अपने जझाबात बया करनेके लिए कोई शब्द ना मिलेंगे तब हम यहां किसी अच्छे शायर के मधुर संगीत से सजे अर्थ सभरऔर  प्यार भरे अपनी पसंद के गीत रख दिया करेंगे.... तुम देखके सुनके बताना केसे लगे तुजे हमारी पसंद के गीत .....  

हमारी पसंद भी हंमेशा कुछ हटके होती हें. .....  




आओ मिल जाये हम सुगंध और सुमन की तरह
एक हो जाये चलो जान और बदन की तरह

दिल के मंदिर में सज़ा रखी हैं मूरत तेरी
मेरे जीने की तो सूरत हैं ये सूरत तेरी
रात दिन साथ रहो, सीने में धड़कन की तरह

एक जीवन की खूशी तुम ने दी एक एक पल में 
भर दिया सारे जग का प्यार मेरे आँचल में 

प्यार का एक भी पल प्यारा हैं जीवन की तरह

 


थोडी सी जमीं, थोड़ा आसमां 
तिनकों का बस, एक आशियाँ

माँगा हैं जो तुम से वो ज्यादा तो नहीं है
देने को तो जान दे दे, वादा तो नहीं है
कोई तेरे वादों पे जीता हैं कहाँ

मेरे घर के आँगन में, छोटा सा झूला हो
सौंधी सौंधी मिट्टी होगी, लेपा हुआ चूल्हा हो
थोड़ी थोड़ी आग होगी, थोड़ा सा धुवां

रात कट जायेगी तो कैसे दिन बिताएंगे
बाजरे के खेतों में कौए उड़ायेंगे
बाजरे के सिट्टों जैसे, बेटे हो जवान
थोडी सी थोडी सी जमीं, थोड़ा आसमां 

तिनकों का बस, एक आशियाँ 


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