Thursday, 26 December 2013

अनंत की सबसे छोटी और गहेरी कविता....

સાચે, હ્રદયની ઝણ ઝણીમાં જબોળી કલમ લખું છું હું. 
તેથી પ્રિયે એ વાંચતાં જ આખે આખી ઝણ ઝણે છે તું. 

""અનંત"  આલિંગનમાં આવતા તો કેટલુંય ઝણ ઝણશું 
હાલ તો ઝણઝણાવે છે, મને માત્ર તારા ટેરવાનું સ્પર્શવુ. 

"અનંત"
आजका બ્લાસ્ટ :- "अनंत" की सबसे छोटी रचना ... 

जिसका जो शीर्षक है वही कविता  है .



और जो कविता है, वही शीर्षक ...   

ये  दुनियाकी सबसे छोटी रचना है.... 

जिसके आस पास बहोत पली बड़ी बनी घटना.... 

और लंबी लंबी कहानी ... 

ये रही "अनंत" की वो दूनियाकी सबसे छोटी रचना .... 

जिसका शीर्षक है ..... "स्त्री"

और कविता भी ....... "स्त्री"

ये "स्त्री" भी कवितासे कुछ कम तो नहीं होती ....

बल्कि पूरी की पूरी कविता होती है " स्त्री" 

"अनंत"

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