Monday, 30 December 2013

अनंत को हुवा प्यारमे पहेला धोखा ....

बड़ी ठण्ड थी उस रात और उदासी भी ..!

दोपहरसे अनंत भीतर भीतर रो रहा था ना बोल रहा था ना गा रहां था  .. 

मेने बहोत समजाया अज्ञानी भी उसे समजा रहा था... 

पर वो बैचेन एक तरफ चुल्हेकी आग एक तरफ दिलकी .. 

बहारकी और भीतर की दोनों आगमें वो जल रहा था... 

इन सारी परेशानियों के बिच जैसे वो पिस रहा था .. 

उस दिन उसे पहेली बार धोखा हुवा था प्यार मै ... 

वो जूठ बोली थी बहोत बड़ा जूठ  जिसे वो चाहता.था 

  वो रोज उसे मिलती .. 

कहानी कुछ इस तरहा थी शरू शरू में महोल्ले वाली गलीमे . 

हमने कच्चा सामान रखने के लिए एक खोली किराए पे रखी थी ...  

अनंत रोज वहा से साइकिल पर जरुरत के मुताबिक़ सामान लेने आता जाता . 

उस  खोली की छत पे उसने कुछ फुल उगाए थे बड़ा शौक था उसे फुल उगाने का. 

वो रोज उसे पानी पिलाने जाता साथ में एक बंसरी वो छत पे जाके थोड़ी देर बजता . 

वैसे उसे कोई सुर ज्ञान नहीं था पर फिरभी मीठी धुन बजाता था..

बजाता था ये कहेने से बहेतर ये होगा की उनसे मीठी धुन बज जाती थी क्योकि 

उसे संगीतका बिलकुल ज्ञान नहीं था ..

उस छत के सामने वाले महोल्ले की छत पर आये घरमें एक लड़की रहेती थी. 

जो अनंत को देखा करती , अनंत भी उसे देखता .. 

अब तो सिलसिला सा बन गया अनंत का छत पे जाना और उनका सामने आना . 

एक दिन उस लड़कीने उसे इसारेसे कहा तुम  निचे गलीमे रुको मै  आती हु.

अनंत रुका वो निचे आई अनंत को पास बुलाया और गले लगाया 

चूम लिया फिर हसके अनंत के चहेरे को देखने लगी . 

पहेली बार किसी लड़कीने ऐसी हरकत की थी .

अनंत को अच्छा लगा पर थर थरथराया .  
   क्रमश ...
ये कहानी बड़ी लंबी है और सची भी कभी खत्म न होगी .. 




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