Sunday, 15 December 2013

सालो बाद बना वो माहोल, जो सालो पहेले बनता था....

*બ્લાસ્ટ* 

મર્યા પછી પણ કોઈક ના હ્રદયમાં ધબકવું, 

એજ આ "અનંત" જીવનની સાર્થકતા છે.! 

"અનંત"  

વાત ના અંતે અનંત પેલી ને કહ્યું હતું કે, હું નથી જાણતો કે, હું તારા હ્રદયમાં ધબકુ છું કે નહીં મગર તું મારા હ્રદયમાં ચોક્કસ ધબકે છે.! 


एक लेखक और शायरका जीवन उस वक्त ही धन्य होता है...

जब उन्हें पढ़ने सुनने और चाहने वालोमे...

सुन्दर और समज दार अन्जान ओरत सामिल हो....

आगे चलके उससे जान पहेचान बन जाए ये और बात है...

ये बात बर्षो पहेले अनंत ने ही कहीथी और लखीथी ...

बात सालो पुरानी है जब हम तीनों….

मै अनंत और अज्ञानी.... 

पुरानी हवेली जैसे घरमे जो खंडर बन चुकाथा,

 वहा महेफिल किया करते थे ... 

चलो आपको भी आज मै उस खंडर में ले जाऊ,

क्यो की आज सालो बाद वैसा माहोल बना है... 

जैसा बर्षो पहेले बना था . 

मै अनंत और अज्ञानी उसी खंडरसे घरमे...

हमेशा की तरहा बैठे थे.

मोम बतिके मध्धम उजालेमै हमारी महेफिल जमी हुई थी.

वैसे रोजाना जब हम मिलते है चाय ही पीते थे

मगर कभी कभी जब दिल भारी हो .

तब शराब भी पी लिया करते थे.. 

उस दिन भी हम तीनों हाथमे पैमाने लिए बैठेथे ....

धीरे धीरे कड़वी घूंट गले के निचे उतारते हुवे नशेमे जुमते हुवे,

लडखडाती जबासे मैने अनंत से पूछा यार ईक बात बता..!

लिखने का सबसे ज्यादा मजा तुजे कब आता है... ?

अज्ञानी खुश हो गया नशेमे जमते हुवे वाह परिया वाह.... 

वो दोनों मुझे प्यारसे परिया कहेके बुलाते थे,

जोकि मुझे बहोत ही प्यारा लगता था .... 

तो अज्ञानी बोला वाह परिया वाह ...

तुने बहोत बढ़िया सवाल किया.. 

फिर अनंतके कंधे पर धब्बा मारते हुवे-

अज्ञानिने अनंत से कहा...

बता अनंत बता आज तू जो भी बोलेगा,

वो पूरी दुनियाके ..

लेखक और शाइर के लिए अहेम बात हो जायेगी...

उन सभीके जझ्बात आज तेरी जबा से बया होगा....

अनंत आधा गीलास खाली कर चुकाथा ... 

अज्ञानी के धब्बेसे अनंत डगमगा गया ,

खुरसी परसे गिरते गिरते संभल गया.

थोड़ी शराब भी गिलाससे छलक गई...

थोडा मेने संभाला थोडा खुद संभलते हुवे,

 अनंत आधा गीलास एक ही सांस पी गया...  

फिर गिलासको टीपॉय पर रखते हुवे,

 लडखडाती जबासे ये शेर अर्झ किया... 

और उसी शेरमे मेरी बातका जवाब दे दिया उसने कहा ....

लिखनेका तब बड़ा मजा आता है "अनंत" ,

जब कोई दिलसे पढ़ता सुनता हो...

थोडा रुक्के फिर लडखडाती जबासे वो आगे बोला... 

और ,,, और,, और,,, 

तब बड़ा ही मजा आता हे परिया बड़ा ही मजा आता है... 

लिखने का और.... 

लिखके पेस करर्रर्रनेका जब सामने हमारे 

चाहने वालोमे....

खूब सूरत और समजदार अन्जान ओरत भी सामिल हो....

मै और अज्ञानी हम दोनों उछल पड़े दोनोंके हाथमे,

 भरे हुवे आधे आधे गिलास,

हमने खुशीके मारे एक ही घूंट में खाली कर दिए .....

ठीक उसी वक्त मैने ये भी पूछा था की ....

अनंत अब मुझे ये बता,

आंसू और शराबके असर में फर्क क्या ?

तब उसने मुझे ये कहा... 

कुछ यादे नई पुरानी दोनों हालतमे होती है शामिल,

दो घूंट शशराब पी या दो बूंद आंसू.

"अनंत" फर्क इतना ही पैदा.   

घूंट से कदम लडखडाए और आसुसे दिल.... 

आज इतने सालो बाद मुझे ऐसा ही लगा ,

जैसे में उसी खंडरमें आ पहोंचा... 

ऐसा मुझे इसलिए लग रहा हे की,

 आज वो बात हुई है जो अनंत ने कभी कही थी....

लेकिन अफसोस...

उनकी गैर मौजूदगिमे एक ऐतिहासिक घटना इतने सालो बाद घटी ...

वैसे तो में यहाँ फेस बुक पर "अनंत" और "अज्ञानी" ,

कई रचना पोस्ट कर चुका हू और ...

चंद दोस्त ऐसे मुझे मिले है यहा,

जो अनंत को चाहते है..

जिसने मेरे यारोके शबदोको लाब्झोको....

पढ़ा है चाहा और सराहां है ...

बड़ा अच्छा लगाता है, प्यारा लगा है,

क्युकी....

वो दोनों जब थे तब अकसर हमारी महेफिल एक खंडर जैसे 

मकान में हुवा करती थी ...

आज मगर बर्षो बाद वो महेफिल यहा जम गई..

जब उनका ही एक शेर मैने पोस्ट किया तो....

जैसे महेफिल सज गई और...

माहोल पूरा शायराना बन गया...

पहेली बार ऐसा हुवा की किसीने उन्ही की जबा मै,

शेर का जवाब दिया उस हमजबा ने

"अनंत" के शेर के बाद जो अर्ज किया वो पढ़ के मारे खुशीके ....

मेरी आँखे नम हो गई ... 

आज मुझे अनंत और अज्ञानीकी...

बहोत बहोत बहोत ! ही याद आई. 

काश आज वो दोनों ये दिन देखने को मौजूद होते  ...... 

आदमी या ओरत जब कुछ भुल जाना चाहता है,

तब अक्सर शराब का सहारा लेता है ...... 

ज्यादातर प्यार भूलाने के लिए ...

हां वही तो है एक ऐसी चीज जिसे लोग....

पहेले पाना चाहते है फिर भुलाना ... 

और वो हे है प्यार , प्रेम, महोबबत.....

जो हर इंसान जीवनमे पाना चाहते है ...

जो पहेले  पाना चाहते है... 

वही बादमे भुलाना चाहते है...

और ऐसा वो तब चाहता है...

जब नाकाम रहेते हे सच्चा प्यार पाने में ...

और  फिर पीने लगते है शराब.....

जो की सबसे होती है खराब ...

ऐसा में नहीं कहुगा लेकिन हदसे ज्यादा खराब होती हे ...

मतलब ये की हदसे ज्यादा पिली जाए तो,,,

शराब से हालत खराब होती...

"वेसे तो हदसे ज्यादा कोई भी चीज अच्छी नहीं होती सिवाए प्यारके ..."

और हां इश्वरकी बनाई इस दुनियामें.

वैसे तो खराब कुछ भी नहीं होता....

इक इन्साकी खराब, और बुरी सोच के सिवा...

लेकिन कोनसी सोच अच्छी कौनसी बुरी...

अब ये कौन बतायेगा ...???

ख़ैर ये भी एक अलगही चर्चाका विषय हे...

मगर ये चर्चा अभी नहीं.. फिर कभी....

ख़ैर ...

ये खयालात उनके हे मेरी  बात और है ...

और वो भी ! अभी  नहीं फिर कभी ...

तो जब महोबतमे  कोई आदमी नाकाम रहेता है...

तब  ऐसे हालातमे वो प्रेमी शराब की और बढ़ता है ...

क्युके पिने वाला ये नहीं जानता की...

शराबसे भी ज्यादा नशा उनकी यादो में और...

आसूओमें होता है .. .


ऐसे ही हालातमे कभी अनंत ने भी पहेली पहेली बार....

शराब पी थी... 

और पिने के बाद लिखा था...

हम उसे भुलानेकी चाहमे  शराब पिने लगते है ...

लेकिन घूंट घूंट पर वो ज्यादा याद आने लगते है ...

कौन कहेता है की पिनेसे आग सिनेकी बूजती है..?

मेने पिके देखि है "अनंत" आग और भी लगती है....

अब आगे वो बात जो उसने कभी कहीथी ,

और मेने दुनियाके सामने रखी थी.... 

December 11



एक दीन रंगीन

पानी पीते पीते

मैने अनंतसे पुछा.

यार मुजे ये बता

आंसु और शराबके

असर मे फर्क क्यां ?

तो उसने ये कहा.

कुछ यादे नई पुरानी,

दोनो हालात मे

होती हे सामील.

दो घुट शराब पी.

या दो बुंद आंसु...

"अनंत" फर्क ईतना ही पेंदा.

शराब से कदम लडखडाये और आंसु से दिल.

"अनंत"

काश... 

आज  अनंत  होता.... 

रो ,रो, के  खुश  हो जाता... 

गम सुदा ,हम जबा, ओ  हाले  दिल... 

लाब्झोमे  ढाले  दिल... 

उन्ही की अदासे मिलता लाजवाब.... 

आपका जवाब.... 

पढ़  सुन के महेसुस  करके.... 

रो,रो के खुश हो जाता... 

काश.... 

आज यहाँ अनंत होता.... 






















Comments


Darshna Suraj Haalaat ke sab maare hai... Jo maikhane tak jaa na sake woh bas aansu ke sahare hai... Zindagi ka itna fasana hai...hum tum dono kahin na kahin dil haare hai!!

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Darshna Suraj Haalaat ke sab maare hai... Jo maikhane tak jaa na sake woh bas aansu ke sahare hai... Zindagi ka itna fasana hai...hum tum dono kahin na kahin dil haare hai!!
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Katira Paresh काश..,. आज अनंत होता ...रो रो के खुश हो जाता ...गम सुदा हम जबा ओ हाले दील, लब्झोमे ढाले दिल ...उन्ही कि बातसे मीलता लाजवाब आपका जवाब ...पढ सुन महेसुस करके ...रो रो के खुश हो जाता ...काश ...आज अनंत होता ...
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Darshna Suraj Anant yahin hai... Uske hone ki khwaish main... Labzo ki aazmaish main... Tum main hum main....anant yahin hai kagaz ke purzo main!!
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Katira Paresh Darshna जी अब रुलाओगे क्या ....
काश ....
ऐसा होता ...
मगर नहीं ..!
अब अगर वो है तो है सिर्फ और सिर्फ kagaz ke purzo main!!..
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Kunjal Pradip Chhaya गर बहेती शराब आंखोसे, तो हम बहकते रोजाना..,,
क्योंकी हर कीसी के बसमें कहां? मैंखानें जाना!
|{©£@ 13.12.13

·         Katira Paresh
आज मै बहोत खुश हुवा हू.... :)
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Katira Paresh


एक दीन रंगीन
पानी पीते पीते
मैने अनंतसे पुछा.
यार मुजे ये बता
आंसु और शराबके
असर मे फर्क क्यां ?
तो अनंत ने जुमते हुवे  कहा.
कुछ यादे नई पुरानी,
दोनो हालात मे
होती हे सामील.
दो घुट शराब पी.
या दो बुंद आंसु...
"अनंत" फर्क ईतना ही पेंदा.
शराब से कदम लडखडाये और आंसु से दिल.
"अनंत"

फिर जब अंतमे  मेने अनंत से पूछा की,

क्या पिने से हम उसे भूल पाते है ?

क्या पिने से आग सिनेकी बुज जाती है ? 

तब अनंत ने मेरे साथ एक घूंट  लगाया ... 

और जुमते फरमाया ... 
   
कौन कहेता है की पीने से आग सिनेकी बुझती  हे ! 

मैने पी के देखि है "अनंत" आग और भी लगती  है ..! 

"અનંત"



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Katira Paresh काश..,. आज अनंत होता ...रो रो के खुश हो जाता ...गम सुदा हम जबा ओ हाले दील, लब्झोमे ढाले दिल ...उन्ही कि बातसे मीलता लाजवाब आपका जवाब ...पढ सुन महेसुस करके ...रो रो के खुश हो जाता ...काश ...आज अनंत होता ...
Darshna Suraj Anant yahin hai... Uske hone ki khwaish main... Labzo ki aazmaish main... Tum main hum main....anant yahin hai kagaz ke purzo main!!
Katira Paresh Darshna जी अब रुलाओगे क्या .... 

काश .... 


ऐसा होता ... 

मगर नहीं ..! 

अब अगर वो है तो है सिर्फ और सिर्फ kagaz ke purzo main!!..

Katira Paresh भई मजा आ गया कई सालो बाद एक माहोल सा बन गया शायराना .... 

ऐसा ही माहोल कभी में अनंत और अज्ञानी .. हमारे तीनों के साथ होते बनता था उसी पुराने खंडरसे घरमे देर रातके बाद... काश... 

Katira Paresh अरे उस वक्त यहा kunjal भी थी और उसने बढ़िया शेर भी लिखा था... 

अब मगर नहीं जाने कहा गई... Kunjal Pradip Chhaya ... સુણો તી... 

Sunil Thakar Wah dost kya mahfil hai ....hum nahi aaiyanga kyu ki .....waha aur dost bhi samil hai...

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