Saturday, 21 December 2013

ढूंढो मत महेसुस करो अनंत ....

अलौकिक अहेसास है। 
"अनंत" तुम्हारे पास है। 
उसे प्यार से हेसुस करो। 
 कुछ खास हो तुम मेरे लिए। 
गर हम तुम्हारे लिए खास है। 
रूह से महेसुस करो। 
"अनंत" तुम्हारे पास है। 
"अनंत" 



जिसकी गहेराई का पता ना हो उस कुंए में कूदना नहीं चाहिए.
गर तहेरना आता ना हो तो "अनंत" प्रेम सागरमें डूबना नहीं चाहिए.
 
भूलेसे भी हमारी वजहसे दिल कभी किसीका टूटना नहीं चाहिए...
जुड़े या ना जुड़े रिश्ते जिश्मके, पर रिश्ता रूह्का टूटना नहीं चाहिए.

हम इस कोने में महेफुझ है, सचमे बहोत ही खुश है, जो चाहे आये,
मिले प्यारसे. मगर हम क्यों है यहाँ ? ये सवाल कोई पूछना नहीं चाहिए.!

जो सामने है इस पलमे उसीका लुफ्त उठावो उसे पढ़ो और बस महेसुश करो..!
“अनंत” याद रहे जो नहीं हें इस दुनियाका उसे कभी भी ढूँढना नहीं चाहिए.

“अनंत” के प्यार दर्द और नमी से भरे इन श्ब्दोको सिर्फ रूह्से महेसुश करो..!
मेरी मानो तो ,ये भी तो एक अलौकिक अहेसास है जीवनका, उसे भूलना नहीं चाहिए.  

“अनंत” 
  

2 comments:

  1. Ek ahilya thi.. Pathar ban ke beech raah padi thi
    ek shabri thi.. Ber main pyar ikattha karti rehti thi
    Ek main thi..rab ke intezaar main Har dard sehti thi
    Ab ek aas dikhi is khandar main.. Raam an to khola darwaza ke
    log ye na kahe
    ek pagli thi jo yahan bhatakti thi....

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  2. वो तो यहाँ आते ही आपने पागल होने का सबूत दे दिया ....

    पगली कही की...:)

    पगली नहीं तो और क्या ...

    यहाँ पाग्लोके सिवा और कोई आता है क्या.... ?

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