नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता दूवाए दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं हसीं लगने लगी हर रहगुजर, आहिस्ता, आहिस्ता बहोत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुम से हया क्यों है तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं मजा जब हैं के तय हो ये सफर, आहिस्ता, आहिस्ता हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बनके आता हैं मगर होती हैं दिल को ये खबर, आहिस्ता, आहिस्ता
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