Thursday, 21 April 2016

धीरे धीरे बात आगे बढती हे ....

मेरे यारने बर्षो पहेले लीखा था !

"अनंत"ईश्क की गहेराई कीसने नापी है!
ईश्क मे सीर्फ अहेसास -ए -रुह ही काफी है !

और सब कुछ तो अपने आप हो जाता है !
जींदगी लंबी हे , और वक्त भी काफी है ! 

कहानी अभी अभी तो शुरु हुइ हे ये तो बहोत 
छोटी हे। लंबी कहानी तो अभी भी बाकी है !

मै कहेता रहुंगा ,तुम सुनती रहेना.
मेरी कहानी मे तुम बहेती रहेना .

हम तुम खत्म हो जाये जब कभी, तब भी !
"अनंत" रुह बोलती रहेगी ,रुह सुनती रहेगी !

मेरे तुम्हारे बाद भी कहानी ये चलती रहेगी। 
अंत नही कोई "अनंत" ये लंबी कहानी है !

जब भी पढोगा कोई नई सी लगेगी सबको, 
वैसै ये कहानी हमारे प्रेम की सदीयो पुरानी है !

"अनंत"रास्ता दुउउउर दुर तलक जाता है ! 
मंजील है ही नही, कौन पहोंचना चाहता है !

हम तो मुसाफीर है , सदीयोसे ईस सफर के ,
"अनंत" हमे तो बस चलनेमे मजा आता है ...
"अनंत" 

लो एक और फटा पुराना पना आज कम हुवा...
और आज रात का मेरा काम भी खत्म हुआ... 

No comments:

Post a Comment