मेरे यारने बर्षो पहेले लीखा था !
"अनंत"ईश्क की गहेराई कीसने नापी है!
ईश्क मे सीर्फ अहेसास -ए -रुह ही काफी है !
और सब कुछ तो अपने आप हो जाता है !
जींदगी लंबी हे , और वक्त भी काफी है !
कहानी अभी अभी तो शुरु हुइ हे ये तो बहोत
छोटी हे। लंबी कहानी तो अभी भी बाकी है !
मै कहेता रहुंगा ,तुम सुनती रहेना.
मेरी कहानी मे तुम बहेती रहेना .
हम तुम खत्म हो जाये जब कभी, तब भी !
"अनंत" रुह बोलती रहेगी ,रुह सुनती रहेगी !
मेरे तुम्हारे बाद भी कहानी ये चलती रहेगी।
अंत नही कोई "अनंत" ये लंबी कहानी है !
जब भी पढोगा कोई नई सी लगेगी सबको,
वैसै ये कहानी हमारे प्रेम की सदीयो पुरानी है !
"अनंत"रास्ता दुउउउर दुर तलक जाता है !
मंजील है ही नही, कौन पहोंचना चाहता है !
हम तो मुसाफीर है , सदीयोसे ईस सफर के ,
"अनंत" हमे तो बस चलनेमे मजा आता है ...
"अनंत"
लो एक और फटा पुराना पना आज कम हुवा...
और आज रात का मेरा काम भी खत्म हुआ...

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