Friday, 29 April 2016

आकाशी तेज तले.. 1


आदमी मुसाफिर है, आता है, जाता है
आते जाते रस्ते में, यादें छोड जाता है

झोंका हवा का, पानी का रेला
मेले में रह जाये जो अकेला
फिर वो अकेला ही रह जाता है
आदमी मुसाफिर है...

कब छोड़ता है, ये रोग जी को
दिल भूल जाता है जब किसी को
वो भूलकर भी याद आता है
आदमी मुसाफिर है...

क्या साथ लाये, क्या तोड़ आये
रस्ते में हम क्या-क्या छोड़ आये
मंजिल पे जा के याद आता है
आदमी मुसाफिर है...

जब डोलती है, जीवन की नैय्या
कोई तो बन जाता है खिवैय्या 
कोई किनारे पे ही डूब जाता है
आदमी मुसाफिर है...


नहीं आज मेने कोई ड्रिंक नहीं किया ...

अरे आज ही तो में होश में आया हु...

हां हलका सा था जटका लेकिन


जाने क्यों मुझे जरा जोरसे लगा

वैसे अच्छा लगा बहोत ही अच्छा....

और बस इस जटके से मुझे होश आ गया...

सायद में बिना पिए थोड़ा बहेक गया था


लेकिन अब में ठीक हु ... होश में हु !

तुम्हारे कई सारे दोस्त हे अच्छे खासे दोस्त हे...

और में तो कही था ही नहीं...

ना दोस्तों में ना दुश्मनों में...

आप अपनी जगे सही है सही थे ...

में गलत था और हु...

बहोत कम लोगो से बात करता हु में भी !

तुम्हारे साथ कुछ ज्यादा ही बात और मस्ती हो गई...

कही में हद पार करने लगा और आज तो मेने हद ही करदी...

हां हद पार करदी हक्क् जताने लगा

और आपको आदेश देने लगा डीपी बदलने का ...

तब जाके पता चला दोस्त तुम्हारे

और भी हे और अच्छे भी हे..

बेस्ट है...

वैसे ये मेने ठीक नहीं किया...

आदेश जो दिया बहोत बुरा किया...

चलो जो हुवा सो हवा और जो हुवा अच्छा ही हुवा...

में संभल गया ....

जीतनी भी गुजरी अच्छी गुजरी....

e best frd che maro

n janoo to bas janoo che maro

आप अपने अच्छे दोस्त और प्यारे जानू

के साथ खुश रहे यही इच्छा ...

चलो एक बार फिरसे अजनबी बन जाए हम दोनों....

अब बिना धमकी दिए ख़ुशी ख़ुशी आप मुझे ब्लेक करदो...

ये व्हाईट होना मेरा बड़ा परेशान करता हे मुजको...

आप मुझे ब्लोक करदो ....

फिर आपको जो चाहिए थी वो परम शांति मिल जायेगी

चलो इक बार फिरसे...

जाते जाते आपसे जो शिखा हे वो...

bay tc gn gm वगेरा वगेरा.

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जो के एवु चाले नै ए साचु !

पण पागल प्रेमी ने कोण समजावे !
पोते भले जे सामे आवे तेना प्रेममा पडे !
पण पेली भुलमाय जो कोई बीजानु नाम ,
उच्चारे ..॥॥
तो भ्ई ने वांघा पडे !
पोते करे ए लीला ने पेली कै करे तो भै ने पीडा
थाय , जीव बारे ...बौ के वाय ...
आवु चाले ज नै !
पण ए पगलाने कोण समजावे !
जे कोई वातमा समजे नै !
जो के आ पुरुष प्रक्रुती छे !
ए जेवो कोईने प्रेम करे ,प्रेममा पडे के तरतज !
एना मनमा तेनी चहीती प्रत्ये -
अघीकार भाव जन्मे !
जोके ,कोई अघीकार पण त्यारे ज अने
तेना पर ज करे ,जेनी साथे प्रेम होय !
आ पण हकीकत छे !
बाकी लश्कर क्या लडे छे !
एनी एने परवा पण ना होय ....
तोय आ सारु तो नाज कहेवाय ने !
पण आवी बघी वातो थी ईवडो ई
साव अजाण !
एक दि' एनी चहीती ए कोई छोकरानी-
जराक वात शु करी ,
ईवडो ई तो गुस्से थै ग्यो अने गुस्से थैने
आ ये तो कोण जाणे कै केटलाय
अर्थमा ! पेली ने कै दीघु !
वर्षो पहेला....
सबको जो देखे वो मुजको ना देखे और "अनंत"
मुजको जो देखे वो कभी कीसी और को ना देखे

"अनंत "
ब्लास्ट :- ईवडो ईज पछी मुंजातो ने के'तो ,
"अनंत" ज्यारे ज्यारे प्रेम थाय छे !
खबर नै, मने आवु केम थाय छे !

"अनंत"
ऐसे ही गम जदा गम सुदा हालातमे 
कभी अनंत ने ये शेर लिखे थे. 

मेरी तस्वीर में सिर्फ में ही में दिखूंगा तुम्हे

मेरे दिल के घाव तस्वीर में ना देख पाओगी 
तब तक सायद में बहोत दूर निकल जाऊँगा 
जब तुम भी गहेरे घाव तलक पहोच जावोगी . 

जाओ जाके मेरे बिस्तर पे पड़ा मेरा तकिया  देखलो 
भीगा तकिया करेगा बया कल रात में कितना रोया .

मेरे जाने के बाद ही जानेगी दुनिया और तुम "अनंत"
की हमने क्या पाया , और आप सबने क्या क्या खोया ,

"अनंत"

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