Wednesday, 11 May 2016

बता तो उस वक्त मै कहा था,


कुछ चूराया हुवा ,

पराया ही सही !

जझबात मेरे हे लेकीन ....

मे नही, ये नही, वो नही , कोई और नही....

आज सीर्फ एक रुह बोलती हे ...

सायद कोई रुह सुने ...

मे ईस जमी पे भटकता रहा , 

कीतनी सदीयो से 

गीरा हे वक्त से कटके 

जो लम्हा उसीकी तरहा 

वतन मीला तो गली के लीये भटकता रहा 

गली मे धरका नीशा ढुंढता रहा बर्षो 

तुम्हारी रुह मे अब जीस्म मे भटकता हु 

तुम्ही से जन्मु तो सायद मुजे पनाह मीले
तुम्ही से जन्मु तो सायद मुजे पनाह मीले

दो सोंघे सोंघे से जीस्म 

जीस वक्त एक मुठ्ठीमे सो रहे थे ,

बता तो उस वक्त मै कहा था,
बता तो उस वक्त तु कहा थी ?

तुम्हारी लौ को पकडके 

जलने की आरझु मे

जब अपने ही आप से 

लीपट के सुलग रहा था 

बता तो उस वक्त मै कहा था ,
बता तो उस वक्त तु कहा थी ?

मे ईस जमी पे भटकता रहा , 

कीतनी सदीयो से 

गीरा हे वक्त से 

कटके जो लम्हा उसीकी तरहा 

वतन मीला तो गली के लीये भटकता रहा 

गली मे धरका नीशा ढुंढता रहा बर्षो 

तुम्हारी रुह मे अब जीस्म मे भटकता हु 

तुम्ही से जन्मु तो 
सायद मुजे पनाह मीले...
******************
मेरे यार ने ...

अपने प्यार से... 

बर्षो पहेले ... 

बड़े प्यार से ...   

ऐसा कुछ कहा था ,

जब रूबरू मिलनेकी ख्वाहिश ...

कभी पूरी नहीं होनी थी ..!

तब अनंत ने अपने प्यार को बड़े प्यार से 

कहा तुम उदास ना हो . 

हम कभी रूबरू ना हो शके तो क्या हुवा ... 

चलो हम यु रूह रूह मिल जाए ... 

ऐसा कहेते हुवे अनंतने रूह रूह मिलनेका झरिया बताया था ... 

और अपनी चहिती को कुछ यु बताया ... 

यु तो हम कभी पास पास आ ना पायेंगे . 
यु मगर हम अभी अभी साथ साथ हो जायेंगे . 

चलो हम ऐसा कुछ करे... 

जो तुमको पसंद हो.
जो हमको पसंद हो. 

चलो कोई एक ऐसी अच्छी सी गझल चुने .!

"अनंत" फिर वहा तुम सुनो यहाँ हम सुने .!

उस गझल के मधुर सुर संगीत्मे हम यु घुल जाए . 
उस गझाल के लाब्झो में हमारे जझ्बात मिल जाए . 

इस कदर  दूउर..दूउर..रहेते हुवे भी हम खुद को एक दुसरे के बिलकुल करीब पायेंगे .
जिस्म से रुबरु ना हो शके ना सही मगर यु हम एक दुसरे की रूह से रूह तक पहोच जायेगे . 

यु, दूउर..दूउर... रहेकर भी हम एक दूसरेको रूह से रूह को करीब पायेंगे ... 
यु, दूउर..दूउर... रहेकर भी हम एक दूसरेको रूह से रूह को करीब पायेंगे ... 

चलो कोई एक ऐसी अच्छी सी गझल चुने .!
"अनंत" फिर वहा तुम सुनो यहाँ हम सुने .!

"अनंत"



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