Sunday, 29 May 2016

ये भी एक तरीका है...


बर्षो पहेले.....
जरा ये तो बता पगली
तुजे पता कैसे चला
की मैने तुजको देखा
बीना देखे मुजे
पता कैसे चलता तुजे
की मैने तुजको देखा...
खैर...
फीर भी मै मान लेता हु अपनी,
तु भी मानले अपनी खता...
मैने तुजको या तुने मुझको...
पहेले किसने किसको देखा...?
अब एसे कभी ना सुलजने वाले
ईन सवालो मे क्यो ऊल्जे हम तुम
एक दुसरे को देखने का गुनाह जब
"अनंत" दोनों ने बराबर कीया
फीर अंतमे पगली तुने ईल्जाम
क्यो सिर्फ अपने सर लीया...
"अनंत" जीतना तुने उतना ही मैने जब कीया हो देखने का प्यारा गुनाह...
तो निभाते चलो युही, अब ना ईल्जाम मे तुजपे लगाऊ ना तु मुझपे लगा...
"अनंत"
मेरे यारने अपनी चहीती से ये बात कही थी.....
बर्षो पहेले.....
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