अने पछी आंचको लागे, तो, मारो वांक नै...
माथा पाछळ हाथ टेकवी, सोफा ने अढेली,
सामे पडेली टीपोय पर पग लंबावी,
बेठेला घोघाए, सामे बेठेली
घोघी सामे आंखे मीचकारी ने कह्यु.....
घोघी घोघा पर गुस्से थई ने बोली,
केम ना लागे...! कांचीडा... !
आंचको केम ना लागे..!
ज्यारे तु तारा लख्खण थी वीरुध्ध वर्ते, बोले तो,,,
आंचको तो लागेज...!
घोघा पण गुस्से थई ने बोल्यो,
हां तो भले लागे, लागवा दे..!
एमा आटली चील्लाय ने मने खीजाय छे शा माटे..!
धोधी ए कह्यु अक्कल वगरना....
लख्खण तारा एवा होय तो, गुस्सो केम ना आवे...!
धोधो कहे,
ए मने ना खबर होय....
गुस्सो केम आवे, केम ना आवे....
पण तारे मने क्यारेय वढवु नै कै दौ छु...!
क्रमश....


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