Monday, 30 May 2016

ये भी एक तरीका ...


ते दि' नी माफकज पीन चोंटी गै
धोधो फरी एक गीत पर अटक्यो ...
केटलाय दि' थ्या धोधी पुछ पुछ करती हती !
एने धोधाने कै कहेवु पण हतु ,
पण या तो शरमाती हती या डरती हती !
डर के शरम ? खबर नै ...
कदाच धोधानुय एवुज !
धोधानेय मनमा डर तो खरोज के जो हंमेशनी जेम कै बफाय जशे ने धोधी पछीथी आवती जती बंघ थै जशे तो ...
एवु नै के धोधी नहोती कहेती ...
कहेती पण हती, पण धोधो समजतो नहोतो !
पछी एक दि' अचानक धोधाने समज फुटी !
पण कहेवु कै रीते ? धोधो मु़जायो ....
हवे धोधो कै लेखक के शायर तो हतो नै ,
के लखीने ने कहे !
हाथवगु हथीयार हतु एक मात्र उछीना शब्दो के पछी मघुर गीत !
प्रीय पात्र साथे पोतानी लागणी व्यक्त करवा
हंमेशा माणस मात्र !
जो खुद साहीत्यकार होय तो ,
पोताना नै तो पारका शब्दोनो सहारो ले छे !
काय ना मले तो कोई गीत !
शुरु ये शीलशीला तो उसी दीनसे हुआ हे !
जबसे कीसीने कीसीकी रुहको छुवा हे !
बस आज कारणे ....
गीत संगीतनी दुनीया सदा बहार छे !
बौ शोघ ना अ़ते धोधाने एक गीत जड्यु
पण हजु आखु गीत याद नहोतु आवतु ....
एटले तेदि'नी जेमज आम तेम आंटा मारे छे ने गणगणे छे !
कस्तीका खामोश सफर हे
शाम भी हे तनहाई भी ,
दुर कीनारे पर बजती हे ,
लहेरोकी शहनाई भी !
आज मुजे कुछ कहेना हे ,
आज मुजे कुछ कहेना हे
बस अहीथी पीन चो़टी गै...
अने धोधी .....
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Comments
Pari Shah · Friends with Kunjal Pradip Chhaya
: कबसे तुम्हारे रस्ते पे मैं, फूल बिछाये बैठी हूँ कह भी चुको जो कहना है मैं आस लगाये बैठी हूँ कि: दिल ने दिल की बात समझ ली, अब मुँह से क्या कहना है आज नहीं तो कल कह लेंगे, अब तो साथ ही रहना है सु: कह भी चुको, कह भी चुको जो कहना है कि: छोड़ो अब क्या कहना है
Katira Paresh अरी ... ओह....
!!
!
!
!
!
!
!
!
घोघी....

जो कहेने वाली थी ....

ख़ैर कहानी अभी बाकी हे.... smile emoticon

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