जाणे आखु बोलवानी बाधाज केम ना लिधि होय, एम ,
घोघा तू केम कायम बधू अधुरु ज बोले छे !
घोघो चुप छे .
हूंह !, तारी साथे तो वात ज करवी बेकार छे ...
अने आमेय मने लागे छे तू मारी वातो थी परेशान थई जाय छे ...
मारी वातो तने तकलीफ आपे छे ने घोघा....
घोघी एक धारु बोलती रही ...
घोघो चुप चाप सांभळतो रह्यो सांभळतो ज रह्यो ...
घोघाने भीतर भीतर अजीब पीड़ा थै आवी ...
घोघिने शु जवाब आपवो, घोघाने समजातु नथी ,
घोघीनु बोलवानु चालु ज छे...
ना बोलता घोघा साथे. बोलता बोलता घोघी बोली गई ....
हवेथी हु तारी साथे वात ज नै करू ....
घोघिना छेल्ला शब्दों सांभळताज घोघानी आँखों तगतगी....
घोघो मौन ....
जरा जरा वातमा झगड़ी पडतो घोघो आटलू बधू कह्यु छता केम चुप !
गुस्साना नशामाथी बहार आव्या पछी घोघिए घोघा सामे जोयु ...
अने घोघी गभराई गई , मनोमन पस्ताई रही,
आ शु .. !
आ शु .. !
घोघानी आँखामा आंसू ....
घोघी घोघानी बाजुमा सोफा पर बेसिने घोघाने खभेथी पकडीने कहे छे ...
घोघा शु थयु !
अने पछी घोघी जे कै पूछे छे ऐना जवाब ,
घोघो मो फुलावी साव टूँका आपे छे
घोघा ..! आम अचानक तारी आंखमाँ आंसू ..केम ...
कई नै ...
अरे बाबा कई बोल तो खबर पड़े ...
नै बोलू ...
तने मारा वात करवाथी तकलीफ थाय छे ...
ना ...
तो ...
तारा वात ना करवाथी थशे ... !
ओह पण हु तो मजाक करती हती ...
हां हां तू पण करीले मजाक ...
हवे कयारेय नै करू बस ,,,
आटलु बोलता घोघीनी आँख पण नितरवा लागी ...
तुज कहे घोघा तो हु शु करू !
केमनी समजू के तारी भीतर शु चाली रह्यु छे ,
ज्यारे तू कोई वात पूरी करेज ना ...
हु कई पण पुछु तू अधुरु बोले या बोलिने अधुरु छोड़े,
तू आम अधुरु अधुरु बोले तो हु शु करू बोल ...
कै नै ...
घोघा तू आवो केम छे !
( जोके घोघो खुद नथी जाणतो के ऐ केवो छे, अने जेवो छे तेवो केम छे ! )
घोघाने खभे थी हलबलावी घोघी पूछे छे.
घोघा ऐ घोघा क्यारथी तू आवो अधुरु बोलतो थई गयो छे !
अत्यार सुधि साव टुंका जवाब आपतो घोघो ...
बारी बहार “आकश” तरफ एक नजर करे छे, अने,
अचानक हिन्दीमा कन्वर्ट थई घोघो बोले छे...
अधुरा आना, अधुरा जाना, अधुरा अफसाना ,
अधूरीआश, अधूरी प्यास.....
अधूरी रात, अधूरी बात, अधुरा साथ,
अधुरा अहेसास...
पूरी की पूरी कहानी अधूरी...
जैसे की पूरा जीवन ही अधुरा....
और,अधुरा में ....
शुरू ये सिल सिला तो उसी दिन से हुवा था ....



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