Thursday, 16 June 2016

बर्षो पहेले अनंत ने मुझे शिखाया था ..!

इसे आँखे बंध करके सुनोगे तो, 

तुम्हे वो दिखेगा जो तुम देखना चाहते हो . 

ये तरीका मेने उन्ही अनंत से शिखा है . 
हां, "अनंत"अकसर ऐसा ही करता था..! 

बर्षो पहेले मुझे अनंत ने शिखाया था , 

खुदमे खो कर अपनी दुनियामे,

 अपनी मस्तीमे कैसे जीना . 

उसने कहा था की ,

जब कभी ! 

मन खुश हो , उदास हो, या हो बैचेन... 
"अनंत "तब बंध करके अपने दो नैन... 

तुम हालत के मुताबिक़ कोई गाना सुनना . 

इस जहा में कई शायरों ने रूह से लिखा है. 

कई गायकोने मुह से नहीं बल्की रूह से गाया है . 

और कई संगीतकारों ने उन रूहानी शब्दों को ,

रूहानी स्वरोको अपने रूहानी संगीतमे  ढाला है .  

बस तुम ऐसे गीत और गझलोको  आँखे बंध करके सुनना , 

जब कभी भी तुम्हारा मन खुश हो, बैचेन हो, या उदास हो, 

अनंत ने मुझे ये भी कहा था की , परिया... 

खुल्ली आंखोसे हमें वो देखना पड़ता है . 

जो दुनिया हमें दिखाती है ... 

और बंध आंखोसे हम वो देख शकते है , 

जो हमें देखना है. 

और हम जो देखना चाहते हे, 

हम बंध आंखोसे  वो देख शकते है ..! 

अनंत ने तो यहाँ तक कहा था की, 

अगर हम देखना चाहे तो ,,,

बंध आंखोसे हम "अनंत" ब्रहमांड भी ! 

देख शकते है ..!    

तू भी आजमा कर देख  ! 

बहोत ही अच्छा लगेगा ... 

और बहोत कुछ अनंत...

अलौकिक अहेसास भी !

तुजे महसूस होगा ..!

जब कभी तुम ऐसा करो ... 

हो शकता हे ऐसा भी हो ... 

हसते हसते तुम रो पड़ो... 

हां ऐसा हो शकता है .! 

अगर इन हालत में  कोई गीत या गझल सुनते सुनते ... 

कुछ आज के हालत और कुछ पुरानी  बाते याद आ जाये ... 

और आँखे छलकने लगे ,आंसू अपने आप बहेने लगे ... 

तो उन बहेते हुवे आंसूओको रोकना मत  ...!

उसे बहेने देना , जितना बहे उतना बहेने देना .... 

भारी मन ,और  ह्रदय का बोज कुछ हलका  हो जाएगा ... 

"अनंत"

@@@@@@@

हमने बहाने से, छुपके जमाने से 
पलकों के परदे में घर भर लिया ... 
तेरा सहारा मिल गया है जिंदगी 
ए जिंदगी गले लगा ले  
छोटा सा साया था, आँखों में आया था 
हमने दो बूंदों से मन भर लिया 
हमको किनारा मिल गया है जिंदगी 
ए जिंदगी गले लगा ले 
ए जिंदगी गले लगा ले 
हमने भी तेरे हर इक गमको 
गलेसे लगाया है 
है ना ? 



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