Monday, 25 September 2017

मेरे वासते....

मेरे वासते....
ईश्क "खूफीया"ना ...
तेरा ईश्क "खूफीया"ना...
ईश्क "खूफीया"ना...
तेरा ईश्क खूफीयाना...
मेरे वास्ते एएएए....
तेरा ईश्क "खूफीया"ना...
सोफा पर बेठा बेठा सामे पडेली टीपोयने तबलु बनावी
जेम आवे एम तबला वगाडता वगाडता ...
धोधो पोतानी मौजमा गीत ललकारतो हतो .
मेरे वासते....
ईश्क "खूफीया"ना ...
तेरा ईश्क "खूफीया"ना...
ईश्क "खूफीया"ना...
तेरा ईश्क "खूफीया"ना...
मेरे वास्ते एएएए....
धोधाने आखु गीत आवडे नै ,अकले ,
गीत आगळ वघे नै, अकले धोधो पोतानी मौजमा ,
एकना एक कडी दोहराव्ये राखे ....
अने, धोधाना रंगमा भंग पड्यो ....
धोधो एकलु बसुरु अने जोर जोरथी ,
अकले के ,उंचा अवाजे गातो हतो के,
धोधानो अवाज छेक धोधीना धर सुघी अने,
धरमा प्रवेशी ने छेक धोधीना कान सुघी,
धोधाना रागडा संभळाई रह्या हता,
अकले के पडधाई रह्या हता.
धोधी धोघाना जे गीतमा छेज नही !
एवा शब्द प्रयोगने कारणे,
मनमा ने मनमा गुस्से थै रही हती ...
अने मनमा ने मनमा ज धोघाने धधलावती हती..
'हुह ! अक्कल वगरनो आवडे नै काय तोय गीत गाय'
आना करता तो मुंगो मरतो होय तो !
"चुप मर गाता ना आवडे तो ,"
हमणा जैने चुप करावु !
एवु धोधी मनमाज वीचारवा लागी.
पण पछी जोके धोधीने आवेला वीचार पर,
फरी वीचार आव्यो ,
अकले एक क्षण माटे धोधीनु मन सुन्न थै गयु.
अकले धोधीए थोडी क्षण पहेला,
मनमा आवेलो वीचार तुरंत डीलीट करी नाख्यो.
केमके अगर ए मुंगो थै जशे तो,???
हु तो लेवादेवा वीनानी मुरजाई जईश ...
तो पछी हु झगडीश कोनी साथे ?
तो पछी हु परेशान कोने करीश ?
अने,अने तो पछी हु,
चींटीया भरी कोना गाल लाल करीश ?
आवा तो कै केकलाय वीचार .....
धोधीना मनमा धुमराई रह्या हता .
अकले धोधीए "मनोमन"
धोधाने धधलाववानु मांडी वाळ्यु -
( कदाच सामे जैनै धधलाववानु,
नक्की कर्यु होय तो कै केवाय नै ...)
-अने नवु वीचारवानु शरु कर्यु.
के,ज्या सुघी पुरु संभळाय समजाय नै,
त्या सुघी धोधाने कै केवु नथी.
अगर कै कैश तो शांतीथी अने "प्रेम" थी कैश के,
धोधा....तु गलत गाई रह्यो छे मारा व्हाला....
मेरे वासते नही ....गीतमा तेरे वासते आवे छे...
अने, ईश्क खूफीयाना नही धोधा...!
ईश्क सुफीयाना आवे छे....
समज्यो..
आम व्हालथी ....
धोघाने एनी भुल तरफ घ्यान दोरवानु वीचार्यु.
पछी तो धोधीए धणी वार सुघी ,
पोताना कान परज शंका करी ,
के,बनी शके धोघो साचुज गातो होय-
( जो के धोघो तो संजोग मुजब साचुज गातो हतो)
-अने मारी समज फेर थती होय ,
जोके ए सीघु क्यारे कै कहेतो बोलतो नथी,.
एटले बनी शके ए साचुज गातो होय ,
अने मनेज गीतना सहारे
कशुक कहेवा मांगतो होय,
अने मने समजातु ना होय,
सहेलु आम तो धणु होय छे जोके, लेकीन ....
उंडा मननो ताग मेळववो अती अती कठीन ...
धोधीए भाईबंघनो कोई कागळ वांची लीघो हशे -
क्यारेक ! क्यारे खबर नै पण,
ए मनमा रही गयु हशे !
अकले मनमाजज धोधी भाईबंघना शब्दो बबडी...
त्या फरी धोधाना गावानो अवाज काने अथडायो...
मेरे वासते....
ईश्क "खूफीया"ना ...
तेरा ईश्क "खूफीया"ना...
ईश्क "खूफीया"ना...
तेरा ईश्क "खूफीया"ना...
मेरे वास्ते एएएए....
तेरा ईश्क "खूफीया"ना....
तेरा ईश्क "खूफीया"ना....
जोके धोधो तो एकघारो चालुज पड्यो 'तो पण,
धोधी वीचारमा खोवायेली होय,
एने कानबार जतु हतु .
कानबार अकले घ्यानबार एम !
एवुय थाय ज्यारे माणस गहेरा वीचारमा होय ,
त्यारे कोई सामे उभु होय तोय देखाय नै ...
अने कोई साव पासे आवीने बोले तोय संभळाय नै ..
लोको आवी अवस्थाने बेध्यान पणु कहे छे पण ,
मने बौ याद नथी पण,भाईबंथ आवु कांक कहेतो के,
बे घ्यान ने बे घ्यान ना समज !
समज ए घ्यानज खरु घ्यान छे !
"अज्ञानी" आनेज खरी घ्याना वस्था कहेवाय ...
आवु कांक ए कहेतो मने बौ याद नथी !
खैर...
धोधी वीचारमाथी जरी बहार आवी त्याज !!!!
फरी धोधाना गावानो अवाज काने अथडायो...
मेरे वासते....
ईश्क "खूफीया"ना ...
तेरा ईश्क "खूफीया"ना...
ईश्क "खूफीया"ना...
तेरा ईश्क खूफीयाना...
मेरे वास्ते एएएए....
तेरा ईश्क "खूफीया"ना...
एना एज शब्दो ,काय फारफेर न्होतो.
धोधो हजुय...
तेरा नी बदले मेरा 'ने,
सुफीयाना ने बदले "खूफीया"नाज गातो हतो.
अने,धोधीनो पीतो गयो....
अने बघु काम पडतु मुकी धोधीए गुस्सानी मारी ,
मारी मारी घोघाना धर भणी हडी काढी....
अने जईने ,कमर पर हाथ दईने ,
उंबरे उभी रै गै धोधाने ए खबर नै,
ए तो एना तानमा गुलतान थै एनु ए गाये जाय छे ,
धोधीए घ्याानखी कान दैनै सांभळवा लागी ....
मेरे वासते....
ईश्क "खूफीया"ना ...
तेरा ईश्क "खूफीया"ना...
ईश्क "खूफीया"ना...
तेरा ईश्क "खूफीया"ना...
मेरे वास्ते एएएए....
तेरा ईश्क "खूफीया"ना....
तेरा ईश्क "खूफीया"ना....
हं मारा कान ठीकज छे !
धोधाना गानमाज मीस्टेक छे !
नक्की !
अने, धोधी छटकी ...
अने, धोधाना रंगमा भंग पड्यो ...
अंते धोधीएज भंग पाड्यो..
धरमा जै ने धोधा सामे उभी रै ने
धोधाने धधलावा लागी ...
गुस्सानी मारी मनमा जे जे न बोलवानु नक्की कर्यु हतु ,
ते बघु बकवा लागी .
थाय , गुस्सामा आवुज थाय ...
गुस्सामा,,,,
बोलवानु होय ए भुलाय जाय ...
अने न बोलवानु बोलाय जाय .....
धोधी साथे एवुज बन्यु ...
जे,जे रीते कहेवानु नक्की करेलु ए भुली गई ...
अने जे न बोलवानुव नक्की करेलु ए बोलवा लागी...
अकले के घोधी गुस्से थै गै एम !
चुप्प ! चुप्प ! चुप ..!
'हुह ! अक्कल वगरनो आवडे नै काय तोय गीत गाय'
आना करता तो मुंगो मरतो होय तो !
"चुप मर गाता ना आवडे तो ,"
पहेला तो रंगमा ओचींतो भंग पडता धोधो चोंकी ग्यो,
पछी , एकदम चुप !
थोडीवार सन्नाटो छवाई गयो ....
धोघो धोधी सामे जोई करुण हस्यो ...
पछी हळवेकथी आंख बंघ करी ...
धोधीने कहे छे ...
अगर तु कहे छे तो हु,,,,,
आकलु अघुरु बोली धोधो
भाईबंघना, भाईबंघना शब्दो बोल्यो ...
"अनंत" मने तो चुप थै मौन रहेवानो मोको मळी जशे ...
मगर...
अगर हु चुप थईश तो तारी भीतर सोपो पडी जशे...
अंते धोधाना गीतमा रहेलु " खूफीया "
रहस्य एमज अकबंघ रही गयु ...
अने धोधी ,,,,,
ब्लास्ट
कालनी वात काले
आजनी वात अत्यारे....
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