Thursday, 1 November 2018

कोई लौटा दे


अल्बेले दिन प्यारे, मेरे बिछड़े साथी सारे
हाय! कहाँ गये, हाय! कहाँ गये

कोई लौटा दे मेरे, बीते हुए दिन - (२) 
बीते हुए दिन वो हाय, प्यारे पल छिन 
कोई लौटा दे ...

मैं अकेला तो ना था, थे मेरे साथी कई 
एक आँधी सी उठी, जो भी था लेके गई 
आज मैं ढूँढूं कहाँ, खो गये जाने किधर - २
बीते हुए दिन वो हाय, प्यारे पल छिन
कोई लौटा दे ...

मेरे ख्वाबों के नगर, मेरे सपनों के शहर 
पी लिया जिनके लिये, मैंने जीवन का ज़हर 
ऐसे भी दिन थे कभी, मेरी दुनिया थी मेरी  - २
बीते हुए दिन वो हाय, प्यारे पल छिन
कोई लौटा दे ...

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