Thursday, 16 December 2021

श्राप



                                *મુંગો શ્રાપ*
                  मेरे घरमे जीसने अंधेरा किया ।

जीवनमे उसके अंधेरा हो ।

बात बात मे जुठ बोलने वाले, 

जा मुंह काला तेरा हो। 

बे वजह जो परेशा मुजक करे, 

परेशान उसको खुदा करे। 

मुजसे तो बचके नीकल जाओगे। 

पर उनसे ना तुम बच पाओगे। 

सबका हिसाब रखता है ईश्वर। 

"अनंत" सबको जवाब देता है ईश्वर।

ओ जुठे को साथ देने वालो

तुम भी संभल जाओ।

वर्ना मेरे श्राप से तुम भी ना बच पाओगे।

"अनंत" 

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