ભાઈબંધ અનંતે વર્ષો પહેલાં...
જે જેવુ લખ્યું હતું તેવુ છાપી માર્યું...
અગર તને એમ લાગે કે
અનંતે બાફ્યુ છે..!
તો હાં મે પણ બાફી માર્યું...
ले मैने खुद को पुरा का पुरा तुजको सोंप दिया।"
अनंत" अब मुज पे मेरा जरा सा भी हक्क नही।
ले मेने खुद को तुजे सोंप दिया।
अब मुज पे मेरा कोई हक्क नहीं।
"अनंत"
तुं आये तो मै नीखर जाउ
तु जाये तो मै बीखर जाउ
अब तुं ही बता ऐ "अनंत"
ईन हालात में मे किधर जाउ।?
"अनंत"
वो भी एक दौर था।
ये भी एक दौर है।
वो हालत भी कुछ और था,
ये हालात भी कुछ और है।
हालांकि उस हालात मे "अनंत"
शांति थी, ईस हालत में शौर है।
मै तो युही नजरे चुरा रहा था तुजसे।
और तुने समजा मनमें मेरे चौर है।
मुह पे मुंह से बोलु मे चाहे जो भी।
लेकिन दिल में जो इश्क है वो प्योर है।
तुं नही तो आंखे खुली हो फिर भी अंधेरा लगे।
"अनंत" तुं होती है तभी तो बंध आंखो मै भौर हैं।
"अनंत"
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