Sunday, 5 November 2023

फ़िरते हैं हम अकेले, बांहों में कोई ले ले

 

फ़िरते हैं हम अकेले, बांहों में कोई ले ले
आखिर कोई कहाँ तक, तनहाइयों से खेले
दिन हो गए हैं ज़ालिम रातें हैं क़ातिलाना



गाना / Title: मौसम है आशिक़ाना - mausam hai aashiqaanaa

चित्रपट / Film: पाकिजा-(Pakeezah)

संगीतकार / Music Director: Ghulam Mohammad

गीतकार / Lyricist: Kamal Amrohi

गायक / Singer(s): लता मंगेशकर-(Lata Mangeshkar)

राग / Raag: Kalyan
मौसम है आशिक़ाना
ऐ दिल कहीं से उनको ऐसे में ढूँढ लाना

कहना के रुत जवां है, और हम तरस रहे हैं
काली घटा के साए, बिरहन को डँस रहे हैं
डर है न मार डाले (सावन का क्या ठिकाना) - (२)
मौसम है ...

सूरज कहीं भी जाए, तुम पर न धूप आए
तुमको पुकारते हैं, इन गेसुओं के साए
आ जाओ मैं बना दूँ (पलकों का शामियाना) - (२)
मौसम है ...

फ़िरते हैं हम अकेले, बांहों में कोई ले ले
आखिर कोई कहाँ तक, तनहाइयों से खेले
दिन हो गए हैं ज़ालिम (रातें हैं क़ातिलाना) - (२)
मौसम है ...

ये रात ये खामोशी ये ख़्वाब से नज़ारे
जुग्नू हैं या ज़मीं पर, उतरे हुए हैं तारे
बेताब मेरी आँखें (मदहोष है ज़माना) - (२)
मौसम है ...

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