Wednesday, 12 February 2025

दूर जाने से पहेले।

વર્ષો પહેલા...

અનંતે લખેલા... 

કાગળીયા ઉકેલતા...

મળી આવી આ રચના.. 

दूर जाने से पहेले। 

दूर जाने के बाद। 

क्या क्या हुआ था? 

अब जब करता हुं याद।

तो बहोत कुछ याद आता है। 

तुने रोका नहीं तो मे रुका नहीं।

गर तुं रोकती तो मे जाता नहीं। 

एक तुहीं वझा नहीं दूर जाने की 

और भी है वझा इसके सीवा कई। 

मे खुद से तो वफा कर न शका। 

और तुने भी तो मुजसे वफा न की। 

"अनंत" प्यार होता ही है कुछ ऐसा। 

जो कभी कीसी को पुरा मीला नहीं। 

"अनंत" 



https://youtu.be/zPh20WG0TCQ?si=zbjIPYAqp8gjh7kW

*ब्लास्ट*

હતો સામે ત્યારે તો તું ઓળખી ન શકી.

હવે શોધે છે તું જ્યારે કે હું સામે નથી. 

"અનંત" 




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