ये वो रचना
है.... अनंत
अपनी एक ऑर प्रेयसी
की खोज
मै था, ओर उसकी
गेरमोजुदगी मै कुछ ना कुछ
लिखता रहता..
एक दिन
वो उसके
सामने आयी...
ओर जो
लीखा था
उसमे से
कुछ हिस्सा
उसे दिया...
ओर प्रेयसी
ने कुछ
हिस्से मै
से जो
पहला पन्ना
पढा था,उसे जानने
के लिये
अनंत बहोत
जिद करता
की तुमहारे
हाथो ने
मेरे कोन
से लब्स
को पहले
छुआ था...
ऑर ये
वही रचना
है..
हम तो टपाली
है..हमारा तो काम है बस यहा आ के टपाल को पोष्ट करना..
एक ह्रदय भीनी लागणी आप तक पहुचाना... हा,
बस हम तो सिर्फ़ टपाली है.. यहा के रखेवाळ है...
ऑर कुछ नही... ऑर कुछ भी तो नही....
*********************************************************
ऐसे तो वक्त ही, बतायेगा की,
क़िसके प्यारमे हम कीतना है|
किसके जीगरमे तडप ज्यादा है
किसको किसका गम कितना है|
यु ही, कैसे कोइ पता लगाये की,
दिल के सीवा दाव मे क्या लगाये
कोइ अब सामने नही देखने वाला
कैसे किस को अपनी वफा बताये
अगर,, कोइ रहना चाहे..! दील मै
खाली जो है उनकी वो जगा बताये|
'अनंत' दे दे अपनी सारी खुशी उनको
उनके खातर आंखोसे गंगाजमना बहाये


No comments:
Post a Comment