Saturday, 14 December 2013

प्रेम और प्यार "अनंत" के विचार....

प्रेम और प्यार
"अनंत"   का  विचार ....

प्रेम और प्यार का फर्क ... 


प्रेम  अलौकिक अहेसास है , और प्यार  लौकिक ...  

पहेले तो आप ये समज लीजिए की प्यार और प्रेम में बड़ा फर्क होता है....

प्रेम प्रेम होता है वो सच्चा या जूठा नहीं होता. प्रेम कभी भी गलत नहीं हो शकता ...

जबकि प्यारमे कभी कभी गलतिया हो जाती है.... 

प्रेम निर्दोष, निखालाश और निश्वार्थ होता है... 

जबकि प्यारमे कही ना कही कुछ ना कुछ स्वार्थ छिपा होता है.... 

प्रेम सभी से किया जाता है .... 

जब की प्यार कुछ खास लोगो से ही कर शकते है.. 

जो की हमारे सबसे करीब हो..... 

प्रेम और प्यारमे एक और फर्क भी होता है....

वो ये के प्रेम दुरसे भी किया जा शकता है.... 

जबकि प्यार ऐसे नहीं हो शकता, 

प्यार तब हो शकता है जब कोई नजदीक हो, करीब हो, तब ही प्यार हो शकता है.... 

प्रेम रूहानी अहेसाश है जबकि प्यार जिस्मानी अहेसास ... 

वैसे  दोनों अहेसास कुछ खास है 


अलग अलग अहेसास होने के बा वजूद  भी दोनोका वजूद एक ही है .... 


और कई  ना समज लोग सिर्फ रूहानी अहेसास की ही बाते करते है.... 


जब की में द्रढता से ये मानता हू और कहेता हू  की रूहानी अहेसासके लिए भी ...


जिस्म का होना जरुरी है बिना जिस्म  भला कोई अहेसास कैसे हो शकता है ... 


रूहानी अहेसास कल्पना से, विचारसे श्ब्दोसे, संगीतसे  महेसुस किया जाता है .. 


और मनसे स्पर्श ... 


प्रेम जिस्मानी  स्पर्श का मोहताज नहीं होता .. 


जब की प्यार जिस्मका मोहताज होता है ...

     
ऐसा मेरे यार "अनंत"" का कहेना , मानना और समजना है... 

ये बात सिर्फ एक स्त्री और एक पुरुष के  संदर्भ कही गई है ... 


मतलब एक स्त्री या एक पुरुष अनेक से प्रेम कर शकते है.... 

लेकिन अनेको से प्यार कर  पाना खुद की तलब और हिंमत पर निर्भर है...      

 प्रेम और प्यारका फर्क इन पंछी की अलग अलग तस्वीरमे नजर आता है ....
प्रेम...    
और... 
प्यार....! 

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