सबसे कुछ अलग सौचता हू मै..
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जिनेका कोई अच्छा सा बहाना हो तो मजा है जिनेका.
और फिर अपना भी कोई दीवाना हो तो मजा है जिनेका.
वैसे जाने पहेचाने लोग तो कई रहेते ही है आसपास.
साथ अगर कोई अन्जाना हो तो मजा है जिनेका.
जो अपने है वो हमें अपना माने कोई नई बात नहीं.
कभी किसी बेगानेने भी अपना जाना हो तो जिनेका मजा है.
अपनोसे तंग आ जाता है हर कोई ईक उम्र के बाद.
ऐसेमें पास कोई प्यारा बेगाना हो तो मजा है जिनेका.
"अनंत" खुशी हमेशा सुख नहीं देती दू:ख भी प्यारा हो.
और कभी जबापे दर्द भरा गाना हो तो मजा है जिनेका.
नशा शराबसे कुछ कम नहीं होता अश्क्मे "अनंत" पी के देख.
हसी के बाद आंखोमे आंसू का पैमाना हो तो मजा है जिनेका.
"अनंत"
किसीके खयालमे आना जाना कोई गुनाह नहीं होता...
"अनंत" गुनाह तो तब होता है जब कोई सामने आये...
"अनंत"
दू:ख इसबातका है “अनंत” जो सामने है वो किसीको नजर नहीं आता...
और गुजर गया हें जो इस जहासे फिर क्यों सभी लोग उसको चाहते है..?
"अनंत"
दू:ख इसबातका है “अनंत” जो सामने है वो किसीको नजर नहीं आता...
और गुजर गया हें जो इस जहासे फिर क्यों सभी लोग उसको चाहते है..?
"अनंत"
उम्रभर मिटती नहीं “अनंत” ये दो भू:ख.
उम्रभर मिटती नहीं “अनंत” ये दो भू:ख.
ईक प्रेमकी इच्छा और दूजी प्रेमिकी हूंफ.
"अनंत"
બ્લાસ્ટ:-
પ્રેમમાં ઉમરને આધીન જે નિર્ણય લેતા હોય છે.
તે ક્યારેય સાચો પ્રેમ કે હુંફ પામી નથી શકતા.
"અનંત"
બ્લાસ્ટ:-
બ્લાસ્ટ:-
સબંધોને અલગ અલગ નામ તો આપણે, અને સમાજે આપ્યા.
બાકી પૃથી પર તો એક સ્ત્રી અને એક પુરુષનો જ જન્મ થયો હતો.
આ સબંધોમાં તો આપણે જાતે બંધાયા,ને બાંધ્યા છે.
હાં નામ પણ અલગ અલગ આપણે સ્તો આપ્યા છે.
પ્રકૃતિએ તો આ પૃથ્વી પર માત્ર ને માત્ર બસ બે પ્રેમી
પાત્ર. અજ્ઞાની" એક સ્ત્રી અને એક પુરુષ જ બનાવ્યા છે.
"અજ્ઞાની"

stri ane purush pan to mann na khali vahem che...ishwar ae potani aatma na be tukda karya che...be juda sharir ma bharya che
ReplyDeleteपहेले सत्य और भरम का भेद पहेचानिये ..
ReplyDeleteलोगोने कहा और आपने मान लिया ...
ऐसी बाते सिर्फ मुर्ख लोग कहेते हें करते है...
ऐसी बाते वो लोग करते हें जो सच स्वीकार नहीं कर शकते..
शुरू से ही आप ये गलती करते आये हो ...
बिलकुल गलत है...
स्त्री स्त्री है और पुरुष पुरुष है..
प्रकृति में हर जगह देखिये यही नजर आयेगा...
दोनों में दोनों के कुछ कुछ लक्षण जरुर होते है...
ऐसा हो शकता हें की किसी जनम में इश्वरने ऐसे जोड़े बनाए हो..
जिसके ख्वाबो खयाल मिलते जुलते हो ....
और दोनों के बिच काफी लगाव रहा हो ..
फिर वो जुदा हो जाये...
फिर कभी किसी भी रूप में सामने आये..
तो उसे ऐसा महेसुस हो की ..
उसे अपना खोया हुवा टुकड़ा मिल गया ...
हां ये सही है की इश्वर दोनों मै ही है और एक ही है...
वो जुदा जुदा नहीं होते ....
और फिर स्त्री और पुरुष दोनों के रूप रंग आकार...
अलग अलग है , तभी तो ये लगाव ये खिंचाव है...
और इन्ही खिंचाव के कारण दुनिया में इतनी बस्ती.. और मस्ती...
और सारे सुख और दू:ख की वजह भी यही समजदारी की कमी...
आपको ये बात सायद पसंद ना आये....
लोगो को वही बात अच्छी लगती है ,
जो उनकी सोच के मुताबिक़ हो...
ऐसा ना होने पर लोग विवाद करते है विरोध करते है....
ऐसे लोगोकी वजहसे ही तो पूरी प्राकृतिक सही गति बिगड जाती है.....
जो है सो है उसे कोई बदल नहीं शकता ...
सिर्फ सोच बदलनी चाहिए ...
sach hai stri stri hai aur purush purush !!
ReplyDeleteprakruti ne unhe aisa banaya...balki sab ko...nar aur maada main vibhajit kiya prakruti ne
par kya ek aatma hamesha stri ka ya purush ka hi sharir dharan karti hai??
aap lagaav...khinchaav...aakarshan ki baat kar rahe hai..
jo ki vaigyanik hai..
par kya kabhi nar nar...aur mada ka mada ke saath lagaav nahi hota??
aap hi ne kahi likha hai ki hota hai..
aap ek baat shayad nahi samaj rahe ...ki main haqiqat ki baat nahi kar rahi..
sharir ke alawa bhi ek duniya hai
wahan nar aur mada ka bhed nahi hai...bharam nahi hai...ek aatma ka dusre aatma ke saath khinchaav hai..
kaha jaata hai ki 'chamadi dekhe kasaai'...
yaani sharir ke aakarshan ki to kai sharte hai...kai roop hai...muje baar baar aapka hi likha yaad aa raha hai
main sirf aur sirf ruhani aakarshan ki baat karti hu...jahan na stri hoti hai na purush
sab ki apni apni soch hoti hai...aur woh nirantar badalti rehti hai !!
फीर सालो बाद अचानक यहा आया तो लगा जैसे बर्षो का फासला मीट गया...
ReplyDeleteखैर..
तु अभी वही अटकी हुई है और भटकी हुई है...
मेरे यारो की तरहा...
आप एक ही बात पर अटकी है अभी तक, जब की आत्मा से आत्मा के आकर्षण और खींचाव की बात को भी जरा भीतर गहेराई मे जाकर झांकीये और गौर से देखीए फिर पता चलेगा की खींचाव की असल वजह क्या है। खैर भीतर देख कर अच्छे से सोचकर मुजे भी बता ना की आपने क्या जाना? और क्या महसुस कीया?
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