Thursday, 26 December 2013

"अनंत" पिजरा नया है पंछी पुराना....

"अनंत" 

क ऐसा पिंजरा है . 

जिसका दर  खुल्ला  है. 

पहेले से टुटा है.? 

नहीं नहीं ऐसा नही.! 
ऐसा हरगीझ नहीं.! 
कई पंछियों ने आ आके.! 
उसे मरोडा तोडा है.! 
आये गये खूब मज़ा लीया.! 
फीर छोडा है.! 
लेकीन अब क्या 
दरवाजा हो या ना हो 
फर्क नहीं पड़ता 
 
कई पंछीओने आ आ के मजा लूंटा हें. 

दरवाजा  यु ही नहीं टुटा है.

अपनी मर्जिसे पंछी आये जाए . 

रोकना चाहे भी तो पिंजरा रोक ना पाए. 

क्योकि दरवाजा खुल्ला है. 

सहा जितना, अब सहा ना जाये दर्द उतना. 

सौचे तो सौचे बस ये पिंजरा इतना . 

 की कभी पंछीओ को भी ये ख़याल आये.

की "अनंत" पिंजरे को भी बहोत  दर्द  होता है.
"अनंत"


अपनी मर्जिसे पंछी आये जाए . 

रोकना चाहे भी तो पिंजरा रोक ना पाए. 


पिंजरे को भी बहोत  दर्द  होता है.


    "अनंत"  

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