Saturday, 28 December 2013

अब मुझे संभालना होगा.....

अब मुझे संभालना होगा. 
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रिस्तेका नाम दिए बगेर गर पलता है दिलमे प्रेम,तो पलने दे  ना.. 
रौशनी दुरसे भी मिलती रहेगी प्यारकी शमा दिल ही में  जलने दे ना...    

मैने संभलने का वादा जो किया है तुजसे, तु मुझे संभल ने दे  ना... 
नजर जुकाए चलता हु मै अपनी राह पे,  संभलके मुझे चलने दे  ना.. 

अब देखू तो प्यार होना का डर लगे और ना देखू तो होवे तु नाराज. 
 वादेकी राह बड़ी कठीन होती हें ,धीरे धीरे बचके मुझे निकलने दे ना..

दूर रहेके भी महोबत सलामत रहेगी उम्र भर के लिए ये वादा रहा.  
क्यों तकलीफ दे हम किसीको ? जेसे चलता हें जीवन चलने दे ना..    

गर भरोषा है तो होगा जरुर होगा कभी तो अंधेरो में उजाला "अनंत" 
धीरे धरे जैसे दिन ढल रहा हें. ऐसे ही धीरेसे  शाम को भी ढलने दो ना..    
"अनंत"  


वादे पे अपने खरा उतरना होगा ...
शमा की तरहा मुझे जलना होगा ...
प्यारकी कठीन राह् पर  "अनंत"....
मुझे  संभल संभलके चलना होगा.
"अनंत" 

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