Thursday, 18 February 2016

ઘોઘાએ કહ્યું ...


घोघाये कह्यु.

घोघी तने मारी साथे मफतमा मजा आवी गई ऐ वात नोखी छे !

बाकी हु तो मात्र मारी मस्तिमा माराज आनंद खातर तारी साथे वात करतो हतो.....

फरी घोघाना गाल पर हलवी व्हाली टपली मारी चुटकी भरता घोघी बोली ...

लुच्चा तू के दि ‘ सुधरीश....

छेल्ले आम कही घोघी घर भेगी थई गई ....

पण ऐ पहेला शु शु थयु !

कोणे कोने शु कह्यु !

मने खबर नै ..

जेना विशे अन्य कोई कशुज वीचारतु के समजतुज के धारतु नथी होतु ..!

एवा आ लोको..

हंमेशा...

खुद एवु विचारता,धारता,समजता होय छे.

खुदमा खुदने खुदज समजे छे...!

'ने पाछा ए लोको एवुय समजे छे ..! के ,,

ए जे समजे छे खुबज समजे छे..!

अने वली एवुय समजे छे के ए जे जेवू ,

धारे छे, वीचारे छे, समजे छे ,

सौ ए मुजबज धारे,विचारे समजे छे..!󾌩

वाह ! क्या खुब समजे छे..!

ठोठ खुदने होशीयार,

अज्ञानी पोताने ज्ञानी,

चोर पोताने दानी,

गांडो खुदने डायो,

ईमारत खुदने पायो समजे छे ..!

घोघो पोताने होशियार ...

खुनी खुदने नीर्दोश...

होश वाले बेहोश...😇

पण अस्सलमा आवु कशुज होतु नथी..!

आवु सडसडाट एक श्वासे धोधाए धोधी सामे त्यारे

बाफ्यु ज्यारे धोधीए धोधाने " धोधो "कह्यु....

जोके एतो छेज !

अटले धोधीए तो कायम कहे छे एमज कह्यु !

पण खबर नै कोण जणे केम ! आजे कैक अलग बन्यु !

लटक मटक करती धोधी धोधाना घरमा धुसीने,

सीघीज धोधाना सोफा सामे राखेली खुरशी पर बेसीने...

अर्घ बीडेली आंखे सोफाने अठेली गरदन ढलेली

मुद्रामा बेढेला धोधाने खंभेथी हलबलावी नाख्यो...

अने धोधी बोली..

धोधा ए धोधा तु क्यारे सुघरीश...!?

जागेलो धोधो सफालो जाग्यो...

अने धोधी पर घग्यो...

अक्कल वगरनी हु घोघो नथी ! हूय होशीयार छु ! समजी !

आ सांभली कान सोती धोधी चोंकी...!

धोधीनी आ़खोयय चमकी !

थोडीवार तो धोधी आंखो पटपटावती ,

धोधा सामे जोवा लागी..

अने सहसा बोली ,'केदि'थी..!!!

जेदीथी कतीराना मोढानी सांभली तेदि'थी...!

केम शु थयु !? शु कह्यु ! शु ते कतीराना मोढानी गालो सांभली के !?

"मोढानी सांभली" आ वाक्य ज्यारे ज्यारे पण कोई उच्चारे छे त्यारे त्यारे....

"बुघ्घीजीवीओ नक्की " गाल सांभली" हशे "

एवुज धारे छे ! वीचारे छे !

ए सीवाय पण कोईना मोढेथी कोई सारी वात सांभली होय शके छे !

एवु वीशेष वीचारवानी वीशेष क्षमता वीचारशीलोमाये नथी होती !

खैर ... ए बघाथी मारे शु वागे लळगे ...󾌩

केम शु थयु !?

शु कह्यु ! धोधा शु

कतीराना मोढानी गालो सांभली के ते ! ?

घोघी ऐ पण !
अस्सल विचार शील बुध्धि जिविओ जेवूज !
धारी लिधू, विचारी लिधू ,

अने सिधुज घोघाने पूछिय लिधू !

आम एक श्वासे एक सामाटा अनेक प्रश्नो करी,

अघीरी घोघी, छेल्ले हीन्दीमा कनवर्ट थै हलवेकथी बोली !

अरी धोधा ! जरा ये तो बता !

ये कतीरा कीस मुलीका खेत हे !

धोधाए कह्यु ये कतीरा मामुलीसा खेत हे !

हवे धोधी गुजरातीमा कनवर्ट थै बोली...!

तैतो ई खेतरमा नक्की कांटा उगता हशे नै .!

नै ,नै.. अवु कै नै ! साथे गुलाब पण उगे छे एमा !

एतो पछी , चुंटता ना आवडे ! तो ,कांटाय वागे !!

घोघी धोधानी माफक माथु खंजवालवा लागी .

माथु खंजवालता खंजवालता धोधी बोली,

अ, अ..अ . हु कै समजी नै हो धोधा !

धोधो कहे ,

ए सारु ज छे धोधी तारामा नाम प्रमाणे गुण छे !

अने ए गुण प्रमाणेज तु वर्ते छे ! सारु छे !

हवे लाग जोई धोधी सीफतथी धोधानी बाजुमा बेसी गै !

"लाग जोईने भाग पडाय प्रेममा !”

नै तो मेळ नो पडे धोधा साथे ए वात धोधी भली भाति जाणती हती के ,

आखरे तो धोधो धरनो नथी ज !

पारकी थापण छे !

माटे डापण ना कराय ...

नैतर आ क्षण पण हाथथी जती रे ' !!󾌹

एटले लाग मलताज धोधानी बाजुमा बेसी,

धोधानी साथल फर हळवी टपली मारी धोधीए धोधाने हीन्दी गुजराती मीक्षमा पुछ्यु ,

ल्या धोधा जरा ये तो बता..!

आवु कतीराए तने क्यारे अने शा माटे कह्यु !

धोधीनो हाथ हजु धोधानी साथल पर ज हतो,

वात करता करता लाग जोई ,

थोडी थोडी वारे धोधी पोतानी नाजुक आंगली !

जाणे खंजवाळ करती होय एम धोधानी साथल पर फेरवी लेती हती .

रखेने धोधी नो हाथ !

साथलथी आगल वघी जाय / जशे तो !?

आवु समजी वीचारीने समज्या वगर कदाच !

कदाच हु के तमे वीचारी लैइये घारी लैइये !

ए तो नाज चाले ने !

आवु बघु सारु सारु ,प्यारु प्यारु तो ,

धोधा के धोधीने वीचारवु जोईये ने !

पण ए बे माथी एकेय आवु चीला चालु नथी वीचारता

एज कारण छे के ए बेऊ प्योर धोधा छे...!

अटले पछी !

धोधीना प्रश्न नो जवाब आपता पहेला धोधाए

हलवेकथी पोतानी साथल पर

गलगलीया करती धोधीन आंगलीने

पंजा समेत उपाडी ,

धोधीनी साथल पर राखता

त्रासा होठे हसता हसता स्वर पर भार दैने कह्यु ,

धोधी ! मने जर्राय खंजवाळ नथी थती !

कदाच तु साथल भुली गै !

आम कही धोधीनो नाजुक नमणो गोरै गोरो पंजो-

एनीज साथल पर मुकी ,

धोधाए धोधीनी साथल तरफ धोधीनु घ्यान दोरता

धोधीने कहयु ,

जो धोधी ! आ रही तारी साथल !

ले हवे एना पर तु तारे नीरांते...ख़ंजवाळ कर !

धोधानी आ हरकतथी जोके धोधीने मजा ना आवी

ए वात नोखी छे !󾌵

होठ समेत मो मचकोडता धोधीए कहयु ,

साव कई आवु ना कराय हों घोघा ! हु तने चींटीयो नो भरत कांय ...

तारो काय भरोशो नै भाय...

चींटीयाना कैक जुना नीशान हजु भुसाया नथी...

आजेय क्यारेक क्यारेक चचरे छे !

ते ई मे थोडा कर्या छे ! मो मचकोडी घोघी बोली .

थोडो धणै तारोय एमा हाथ छे ! घोघाये कह्यु..!

हाथ ! अरे गांडा हाथथी तो व्हाल कराय...

चींटीया थोडीना भराय हें, चीटीया थोडीना भराय...

चींटीया तो आम जो आ आ़गलीथी आम भराय...

एम कही धोधीए धोधानी साथल पर ,

जोरदारनो चींठीयो खण्यो...

ओ.. औ... ओ... धोधी..ई... ई....ई...

धोधाना मुखेथी चीख नीकली गई....

आम क्यारनी मनोमन घुंघवायेली धोधीनो गुस्सो

अंते नाजुक आंगली वाटे धोधानी साथल पर

वीसर्जीत थयो....

हा... आ...आ...श...बदलो लीघा पछीज धोधीने हाश थै

हवे बोल धोधा !

कतीराए तने क्यारे, शा माटे अने शु जोईने ?

तारा जेवा अक्कल मठा धोधाने होशीयार ...

कहेलो , बोल ! हवे जल्दी बोल !

सोफा परथी उभो थै आमतेम आंटा मारता,

धोधीना चींटीयाथी समसमी गयेला धोधाए चचरती

साथल पर पोतानोज हाथ पसारता पसारता गुस्से थै

धोधीने कह्यु ,

नै बोलु ! हवे तो नैयज बोलु जा !

धोधानी पासे जता जता धोधी बोली ..

अच्छा... एम वात छे !

तो तु एम नै बोले ,उभोरे हमणा खबर केम नै बोले .!

धोधीने आंगली अने अंगुठाने चींटीयानी मुद्र्मा गोठवी-
पासे आवती जोई ,

धोधो पाछा पगे सोफा पाछल भागे छे !

घोधी हाथमा जाणे खुल्ली छरी होय एम धोधाने चुंटीया चपटी बतावता एनी सामे सामे चाले छे !

आम सोफानी आसपास धोधो ने धोधी चक्कर काटे छे,

सोफानी फरते पकड दाव रमता होय एम दोडा दोडी करता करता धोधाने धोधीनुज ठेबु लाग्यु अने धोधो पडता पडता रै ग्यो ..

सोफाना सहारे पडतो धोधो संभली ग्यो एटले बची ग्यो जो के !

पण स्थीती ए हती के ,

अगर जो धोधो पडी जात
तो धोधी धोधानी माथे चडी जात
तो , पछी , कदाच न थवानु थात !
तो , कदाच धोधीनेय मजा पडी जात !

आ स्थीतीमा आवु कदाच हु , के ,तमे वीचारी लैईये ...

पण मारा के तमारा वीचारवाथी कशुज ना थाय !

जे कंई फण थाय ए , ए , बंने ना वीचारवाथीज थाय !

अने सौथी मोटी तकलीफ एज छे के ए वीचारता नथी !

अटले मारा तमारा वीचार मुजब तो ,

कशु ज न बन्यु पण !
अंते धोधानी कमर धोधीने हाथ लागे छे 'ने पाछी धोधी धोधानी कमरे बे आंगली दाबे छे !

एने धोधी तख्ताना टोनमा बोले छे !

बोल हवे ! भागी भागीने केटले भागीश ...

ज्यारे ज्यारे हाथ लागीश...

त्यारे त्यारे...

धोधा ! तु मारा चींटीयानो स्वाद चाखीश...

धोधीना नाजुक आंगलीना तीक्षण चींटीयाथी छुठवा ,

धोधो धोधीए कमरथी पकडेला तेना कर छोडाववा

रीतसरनो करगरवा लाग्यो अने पीडीत स्वरे धोधीने
कहेवा लाग्यो ...

कौ छु .. कौ छु आ ..ओ...

कौछु धोधी !! पण पे'ला तु मारी कमर परथी तारो

चींटीयो तोसछोड पछी कौ..

तो ढीक छे चाल बेस सोफा पर !

धोधी धोधाने कमरेथी ची़टीया सोत सोफा पासे लै गै

'ने चीटीयो छोडी धोधाने घब करतो

सोफा फर बेसाडी दीघो..

अने पोतेय सामे पडेली खुरसी पर बेसी गै !

हा आ आ श... ओह !

हाशकारा साथे उहकारा करतो धोधो कमर पर हाथ फरावे छे !

आ जोई धोधी हसता हसता बोली ,

हवे बोल धोधा !

कतीराए तने क्यारे, शा माटे अने शु जोईने तारा जेवा

अक्कल मठा धोधाने होशीयार ...

कहेलो बोल ! हवे जल्दी बोल !

अरे यार ! एतो एणे वर्शो पहेला मने मजाकमा कहेलु !

घत्त तेरीकी ...!

दीमागनी तो चटणी करी नाखी ! हुह !

पोताना प्यारा धोधाने कोईए पहेली वार होशीयार कह्यो

ए वात जाणी मनोमन हरखाती धोधीना हरख पर,

ए जाणी ने पाणी फरी वल्यु के ,

एतो वर्शो पहेला कतीराए करली मात्र मजाक हती !

कतीराए मारी मजाक करी एमा तु शानी हुहकारा करीने छणका करे छे ! ?

अक्कल वगरनी अंते मारे तने भाईबंघनो भडाको संभलाववो पडशे...

एना अवाजथी कदाच तारी अक्कल ढेकाणे आवशे तो आवशे , नै तो थोडी धणी नै जेवी छे ,

ए बुघ्घीय बेर मारी जाशे..!

ब्लास्ट फोर भाईबंघ :-

सांभल धोधी !

" वखाणमा छुपायेलो व्यंग अने व्यंगमा छुपायेलु सत्य-
"अज्ञानी" बौ ओछा लोको समजी , पचावी शके छे ..!"

हुह करीने चुप बेठेली वीचार मग्न धोधीने टपली मारी धोधाए पुछ्यु ...

काय हमज पडी..!?

धोधी वीचारमाथी जबकी ए साथेज एना मनमा कंईक जबकारो थयो..!

एटले टगर टगर धोधा सामे जोई धोधी बोली ,

आम तो जोके एनी वात खोटी नथी हो धोधा !

कोनी कै वात वीशे धोधी बोली खबर नै !

घोघिनो मजाकने साची ठराववा पाछळनो आशय घोघो समजी गयो एटले घोघी सामे जोई कह्यु ..

अच्छा... अटले पोताने होशियार साबित करवा तू खोटाने पण साचो ठेरवे छे ! हे ने !

अटले , अटले तु एम कहेवा मागे छे के तु धोधी नथी !
जा बे जा एवा भ्रम मा नो रे'ती !

एवा भ्रममा तो जो हू छु तोय हु नथी !

ना हवे, एवु काय नथी आम कही घोघाना गाल पर हळवो चीटियों भरी घोघी लजवाई गई ...

अने पछी खुरशी परथी उभी थई अने ...

उ..उ...उ आह ! अंगलाई लेता लेता घोघी बोली ...


बधू जे होय ते पण धोधा !

घणा समय पछी आजे तारी साथे वात करी समय

पसार करवानी बौ मजा आवी हो बाकी !

घोघाये कह्यु.

घोघी तने मारी साथे मफतमा मजा आवी गई ऐ वात नोखी छे !

बाकी हु तो मात्र मारी मस्तिमा माराज आनंद खातर तारी साथे वात करतो हतो..

अने मारो समय पसार करतो हतो शु समजी !󾌥

फरी घोघाना गाल पर हलवी व्हाली टपली मारी चुटकी भरता घोघी बोली ...

लुच्चा तू के दि ‘ सुधरीश....

आम कही घोघी घर भेगी थई गई ....

No comments:

Post a Comment