Saturday, 26 March 2016

मेरे यार ने ...


मेरे यार ने ...
अपने प्यार से...
बर्षो पहेले ...
बड़े प्यार से ...
ऐसा कुछ कहा था ,
जब रूबरू मिलनेकी ख्वाहिश ...
कभी पूरी नहीं होनी थी ..!
तब अनंत ने अपने प्यार को बड़े प्यार से
कहा तुम उदास ना हो .
हम कभी रूबरू ना हो शके तो क्या हुवा ...
चलो हम यु रूह रूह मिल जाए ...
ऐसा कहेते हुवे अनंतने रूह रूह मिलनेका झरिया बताया था ...
और अपनी चहिती को कुछ यु बताया ...
यु तो हम कभी पास पास आ ना पायेंगे .
यु मगर हम अभी अभी साथ साथ हो जायेंगे .
चलो हम ऐसा कुछ करे...
जो तुमको पसंद हो.
जो हमको पसंद हो.
चलो कोई एक ऐसी अच्छी सी गझल चुने .!
"अनंत" फिर वहा तुम सुनो यहाँ हम सुने .!
उस गझल के मधुर सुर संगीत्मे हम यु घुल जाए .
उस गझाल के लाब्झो में हमारे जझ्बात मिल जाए .
इस कदर दूउर..दूउर..रहेते हुवे भी हम खुद को एक दुसरे के बिलकुल करीब पायेंगे .
जिस्म से रुबरु ना हो शके ना सही मगर यु हम एक दुसरे की रूह से रूह तक पहोच जायेगे .
यु, दूउर..दूउर... रहेकर भी हम एक दूसरेको रूह से रूह को करीब पायेंगे ...
यु, दूउर..दूउर... रहेकर भी हम एक दूसरेको रूह से रूह को करीब पायेंगे ...
चलो कोई एक ऐसी अच्छी सी गझल चुने .!
"अनंत" फिर वहा तुम सुनो यहाँ हम सुने .!
"अनंत"....
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