Thursday, 28 April 2016

आकाशी तेज तले ...4

ये गीत आज भी उस  खंडर में गूंजता है ... 

जहा कभी अनंत अपना जीवन गुजारा  करता था ... 

और  आज  वही गीत इस खंडर में भी गूंजता  है  ... 

बहोत  सी यादे  और  बाते  जुडी  है अनंत  के जीवनकी इस गाने के साथ ... 

धीरे धीरे हम सब बताते जायेंगे ... 

आज भी कही दूर दूर से उसकी रूह उसे पुकारती होगी ...

हां उसे ही पुकारती  होगी  ... 

जिसको अनंत की सिर्फ अनंत की तलास हो .... 

और वो आएगी इस जनम में ना सही अगले जनममे ... 

अनंत कहेता था जब तक की वो मुझे मिलने मेरे सामने ना आएगी 

में उसका इन्तजार करुंगा जन्मो जनम तक ... 

जाने कहा भटक रहा होगा मेरा यार....

कहा कहा भटक रहा होगा ...  


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