कल में होश में नहीं था तो बहोत कुछ बोल चूका ...
लेकिन आज अभी में बिलकुल होश में हु ...
अब मै कुछ न बोलूँगा ...
कुछ करने के लिए बेहोश होना जरुरी हे ...
पागल होना जरुरी हे ...
अक्कल मंद इस जहा में वो नहीं कर शकते कभी भी !
जो एक पागल इन्सान कर शकता हे ...
फिर चाहे प्यार ही क्यों ना हो ..
और जहा में जो कुछ अजीब बना बनाया हे ..
ये किसी समजदार ने नहीं बल्की किसी पागल ने ही बनाया हे ...
रात भर जाग जाग के लिखना , गाना , बजाना और भी बहोत कुछ ...
ऐसा नहीं की नशा शराब में ही होता हे , और नशा शराब का करके ही -
कोई मदहोश , बे होश , या बे खुद हुवा जाता हे ..
नशा हर उस चीज मै होता हे जो जी को भा जाए ...
नशा किसीकी आँखों में , किसीके होठो में ,
किसी के बालो में ,किसी के गालो में भी नशा हो शकता है ..
किसीकी आंखोमे जांकते ही दिलमे नशा छा जाता हे...
किसीके गुलाबी होथोको चुमते ही जिस्म में नशा छा जाता है...
किसी के गालो पर हथेली रहते ही ,
थर थराते हुवे सर से पाँव तक नशा छा जाता है ...
किसीके घने बालोमे उंगली घुमाने से भी तन बदन में नशा छा जाता है ...
ऐसा नशा गर मिल जाए तो फिर बोतल की जरुरत ही नहीं रहेती ...
हम झूम उठाते हे किसी के प्यारमे , प्यारसे और बड़ा ही मजा आता है...
औरत के लिए वो मर्द और मर्द के लिए वो औरत...
और हर वो शख्स जो जी को बहेलाये ...
ऐसे वो लोग होते हे जो वैसे भी नशे से भरपूर होते हे ...
जो दिलो दिमाग पर छा जाए ....
ऐसा हर शख्स हर वख्त इन्सान को नशे में चूर बेहोश कर शकता हे ...
ऐसी हर चीज नशे में चूर कर शकती हे ...
जो कुछ जझ्बात से जुडा है ...
और भी कुछ ऐसे काम हे जो होशमे नहीं किये जाते ...
उनके लिए एक अजीबसा पागल पन जरुरी होता है...
ऐसे कुछ काम हे जिस काममे रियाझ जरुरी होता है...
और रियाझ दिन रात देखे बिना ही होता चलता है...
बस यही मेरा कहेना हे ...
गर जीवन में कुछ भी अगर करना हे तो बस तुम भी पागल बन जावो ...
लेकिन पागल होना या होके रहेना हर किसी के बस की बात नहीं....
मेरा यार अनंत अकसर ये बात मुझे कहा करता था ...
और अब जब में होश में आही गया हु , तो सुनले तू ...
कभी कभी थोड़ी देरके लिए बहेक जाता हु ये बात और है ,
लेकिन अकसर
मे आँखे मीचे पीछे पीछे आने वालो मेसे नहीं हु ...
ये बात बिलकुल बिना घमंड में बडे ही प्यार से तुजे कहेता हु....
वैसे ऐसे ही बड़े प्यारसे में रे यार ने अपनी चाहिती से कभी ये बात कही थी ...
जो की बेहद खूब सूरत थी पर जब वो बात बात पर अक्कड रही थी ...
तब जाके अनंत ने उसे कहा था ...
ओ हसींन तू हँसी होने का कभी घमंड मत रखना ..
"अनंत" इश्वरने दिया हे मुझे भी हँसी नवाबी चहेरा...
उम्मीद ये भी है कभी तू ये गीत गाये ...
और बड़े प्यार से मुझे सुनाये ....
उम्मीद ये भी हे की कोई ये गीत भी गाये ..और ...
और उम्मीद ये हर मर्द की होती हे अकसर ...
जब कभी वो उदास हो तब पास आके कोई उनके लिए ये गीत गाये ...
में भी चाहता हु जब कभी मेरे दिलपे उदासी छाए ...
तब मुझे चाहने वाली मेरे पास आये और कहे ..
तुम अपना रंजो गम अपनी परेशानी मुझे देदो ...
और हर मुलाक़ात के बाद बस यही कहे हम उन्हें कोई हमें...
अभी ना जावो छोड़ कर के दिल अभी भरा नहीं..
और जब वो जाए तो कहेने को जी चाहे ...
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