Tuesday, 10 May 2016

फिर जाने कहा से ये गीत मेरे कानो से टकराया ...


एक गीत क्या मेरे कानोसे टकराया मुझे वो सारे गित याद आ गए ....

जो कभी प्यारमे तन्हाई में सुनता रहेता था गाता रहेता था सुख में और दू:ख में,

और मुझे याद आ गया वो गली वो महोल्ला ,

और महोल्ले में आया हुवा वो घर जो अब खंडर बन के रहे गया हे , 

उसका कोना कोना 

मेरी आँखों के सामने वो मंजर कुछ यु आ गया , 

मुझे लगा जैसे  में आज भी वही पर एक कोने में बेठा देख रहा हु अनंत को....  

ये वो गीत है सारे जो अनंत दिलके हालत के मुताबिक़ गाता सुनता रहेता था  अकसर ... 






















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