Monday, 9 May 2016

आज कुछ अज्ञानी की लिखी बाते ...


"अज्ञानी" कोई नहीं बदलता ... 

कोई किसीको बदल ही नहीं शकता ... 

फिर भी सबको हे लगता मेने कुछ बदला किसीको बदला ... 

जब की सब अपने आप बदल रहा ... 

क्या आदमी क्या औरत और क्या सारा जहा .... 

सब अपने आप बदल रहा ..

कोई किसीको नहीं बदल  शका... 

सब अपने आप बदल रहा ... 

फिर भी हर किसी को ये लग रहा ... 

"अज्ञानी" ये जग सारा मेने बदला....

आये गए कई साधो सूफी संत ओ फ़क़ीर.... 

कोई बदल नहीं शका ना बदलने वाले की तकदीर.... 

"अज्ञानी"


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