Saturday, 18 June 2016

मेरा तो जो भी कदम हे वो तेरी राह में है ....

बड़ा ही कठिन और संघर्षमय जीवन था ... 

पूरा दिन कड़ी महेनत और बदन पसीना पसीना ... 

ऐसे हालातमे कैसे जीना ..? 

कोई तो तरीका , कोई तो सहारा चाहिए होता हे ना जीने के लिए ...

फिर सहारा लिया गया ऐसे गीतों का ... 

हां और भी सहारे मिले लेकिन.... 

दूर तलक सिर्फ ये गीत ही साथ रहे जो आज भी साथ है ... 

मुझे याद है वो एक एक पल आज भी ! 

आज भी पल पल मेरे सामने आ जाता है ,

पसिनेसे लथबथ  चहेरा अनंत का ... 

और फिर ये आँखे ... 

अब छोड़ो भी इसे तो नम होना ही था ... 


हां जब  आसुमे पसीना और पसीने में आसू मिल जाते थे ... 

तब सब सारे गम चुप चाप  छुपाता हुवा अनंत का चहेरा ...

आज भी मेरी आँखे नम कर देता है ... 

अनंत मेरा सहारा था में उनका 

लेकिन अंत तक में सहारा ना बन शका अनंत का ... 

हम दोनों अकसर एक दुसरे के लिए ये गीत गाया करते थे ..! 

लेकिन आज में सिर्फ उसे याद करके उनके लिए .... 

मेरा तो जो भी कदम हे वो तेरी राह में है 
के तू कही भी रहे तू मेरी निगाहमे है 

खरा हे दर्द का रिश्ता तो फिर जुदाई क्या 
जुदा तो होते हे वो, खोट जिनकी चाह में है 

मेरा तो जो भी कदम हे वो तेरी राह में है 
के तू कही भी रहे तू मेरी निगाहमे है 

छुपा हुवा सा मुजी में ऐ तू कही ऐ दोस्त 
मेरी हँसी में नहीं हे , तो तू मेरी आह में है 

मेरा तो जो भी कदम हे वो तेरी राह में है 
के तू कही भी रहे तू मेरी निगाहमे है 



और अनंत अकसर ये गीत गाता रहेता था 
बस ऐसे ही गाने सुनते सुनते वो आगसे खेलता रहा ... 

दुःख हो या सुख 
जब सदा संग रहे ना कोई 
फिर दुःख को अपनाइये 
कि जाए तो दुःख ना होए 

राही मनवा दुःख की चिन्ता क्यों सताती है 
दुःख तो अपना साथी है 
सुख है इक छाँव ढलती आती है जाती है 
दुःख तो अपना साथी है ...

राही मनवा दुःख की चिन्ता क्यों सताती है 
दुःख तो अपना साथी है 

दूर है मंजिल दूर सही 
प्यार हमारा क्या कम है 
पग में कांटे लाख सही 
पर ये सहारा क्या कम है

हमराह तेरे कोई अपना तो है  
हमराह तेरे कोई अपना तो है  

सुख है इक छाँव ढलती आती है जाती है 
दुःख तो अपना साथी है ... 

दुःख हो कोई तब जलते है 
पथ कर दीप निगाहों में 
इतनी बड़ी इस दुनिया की 
लंबी अकेली राहो में 
हमराह तेरे कोई अपना तो है 
हमराह तेरे कोई अपना तो है 

सुख है इक छाँव ढलती आती है जाती है 
दुःख तो अपना साथी है ... 



और जब कभी दिनभर महेनत करके जिश्म थक जाता  
और फिर  कभी जब दिलो दिमाग के हालत बहोत बिगड़ जाते.. 
तब अनंत  आंसू पीते पीते ये गीत गाया करता था ...  

बे खुदी का बड़ा सहारा है 
वर्ना दुनिया में क्या हमारा है 
लोग मरते हे मौत आने से 
हमको इस जिंदगी ने मारा है 
बे खुदी का बड़ा सहारा है 

इस मुकद्दर के ये सितम देखो 
डूबते जा रहे है हम देखो 

और वो सामने किनारा है 
बे खुदी का बड़ा सहारा है 

आदमी कुछ भी कर नहीं शकता 
वक्त ऐसा गुजर नहीं शकता 
वक्त ऐसा मगर गुजारा है 
बे खुदी का बड़ा सहारा है 

कितनी हल्की है कितनी बोझिल है 
कोई औरत नहीं ये बोतल है 
बन्द इस में जहान सारा है 
बे खुदी का बड़ा सहारा है 
@@@@@@@@@@@



और फिर कभी कभी अनंत ये गीत ऊँची आवाजमे गाता था ..  
क्योकि वो अपनी प्यारी को सुनाकर कहेना चाहता था की  

डूबे नहीं युही हम नशेमे अकेले 
शीशे में आपको भी उतारे चले गए 

@@@@@@@@@@@@ 

हम बे खुदी में तुमको पुकारे चले गए 
सागर में जिंदगी को उतारे चले गए 

देखा किये तुम्हे हम बनके दीवाना 
उतरा जो नशा तो हमने ये जाना 
सारे वो जिंदगी के सहारे चले गए 
हम बे खुदी में तुमको पुकारे चले गए 

तुम तो ना कहो हम खुद ही से खेले 
दुबे नहीं युही हम नशेमे अकेले 
शीशे में आपको भी उतारे चले गए 
हम बे खुदी में तुमको पुकारे चले गए









और कभी कभी ये गीत अपनी प्यारी के लिए भी गा लिया करता था .. 





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