Monday, 11 July 2016

अनंत नि भीनी भीनी झरमर झरमर वरसादी याद ......

आ भीनी भीनी मादक मौसममा
भाईबंधनु भीनु भीनु गीत पराणे याद आव्यु,
ने, लखवा हु लाचार थई गयो बोलो !
धरती नारी ने
आकाश नर रे ...
आकाश नीतारी नीर रे...
करे धरतीने तरबतर रे ...
धगधगती धरती आकश माटे तरसे ...
धरतीनी छातीए आकाशनी बुंद बुंद वरसे....
पछी धरती छातीमाथी उठे छे ,
भीनी भीनी मादक सुवास रे ...
धरतीनी उघाडी छातीने ढांकवा...
"अनंत" आकाश ओढाडे लीला घास रे ...
आ आकाश ऐ नर ने, ...
धरती ते नार छे....
जो आकश वरसी गयु धार धार ....
ऐ जोई झण झणी उठ्या ह्रदयना तार तार रे...
बोल ! प्यारी हवे तारो शु विचार छे ... ?
"अनंत"
*ब्लास्ट*
आवता जता "अनंत" नर नारी पथ पर ...
सौ भीना भीना अंग कोईना ना कोरा....
सौ प्रेमथी लथबथ ....
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Comments
Katira Paresh
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1 comment:

  1. Anant jaaNe chhe aakash ane Dharti nu Milan nathi.... mate j Milan mate aakash na hraday rupi, badal rupi nayan dware thi varsha na amrutmay meghbinduo nu sarjan thayu

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