बर्षो पहेले अनंत ने कहा/लीखा था...
मेरी खोज .. मेरी तलास..
मेरी खोज .. मेरी तलास..
वो ही ! हमारे लिए ख़ास हे ! जिनके लिए हम ख़ास हो.!
जब तक वो ना मिले, दूर ही सही, दिलसे मगर पास हो.!
जब तक वो ना मिले, दूर ही सही, दिलसे मगर पास हो.!
में प्रेमका दरिया नहीं ! झरना हु. फिरभी हु में प्यासा.
उस प्रेमको ढूंढ़ता हु में, जिसे, मेरे प्यारकी प्यास हो.
उस प्रेमको ढूंढ़ता हु में, जिसे, मेरे प्यारकी प्यास हो.
प्रेम अनंत है अनंत कालसे हे और अनंत काल तक रहेगा.
होगा कही तो तुमको भी चाहने वाला. तुम ना यु उदास हो.
होगा कही तो तुमको भी चाहने वाला. तुम ना यु उदास हो.
वैसे तो हर लम्हा में अपनी ख़ुशी मस्तीमे जीता हु, तब तक
में उदास नहीं होता, जब तक मेरे बगैर, ना कोई उदास हो.
में उदास नहीं होता, जब तक मेरे बगैर, ना कोई उदास हो.
हां “अनंत” कालसे भटकता हु अज्ञानी की तरहा. में सिर्फ
उसे ही ! खोजता हु. मेरी ही तरहा जिसे सिर्फ मेरी तलास हो.!
उसे ही ! खोजता हु. मेरी ही तरहा जिसे सिर्फ मेरी तलास हो.!
“अनंत”
ऐसा नही की कही नही होगी वो.
कही ना कही तो, छुपी होगी वो.
ऐसा नही की कही नही होगी वो.
कही ना कही तो, छुपी होगी वो.
अगर मे उसके बारे मे सोचता हु,
तो मेरे बारेमे भी सोचती होगी वो.
तो मेरे बारेमे भी सोचती होगी वो.
जैसे मे भटकता हु खोजता हु उसे,
इधर. उधर मुजे भी खोजती होगी वो.
इधर. उधर मुजे भी खोजती होगी वो.
"अनंत" जीवनी की इस यात्रा मे जब -
कभी कही मीलेगी तब होगी वोही वो.
कभी कही मीलेगी तब होगी वोही वो.
"अनंत" भीडमे से पहचानकर.. भीड चीरते हुवे पास-
आकर, जो मुझे सीनेसे लीपट जायेगी वोही होगी वो.
आकर, जो मुझे सीनेसे लीपट जायेगी वोही होगी वो.
"अनंत "
"अनंत "
*બ્લાસ્ટ*
પહેલા, જુદાઈમાં કેમ જીવવું !.
એ મારગ મને તું ચીંધી દે..!
"અનંત" ! પછી તું તારે,
પ્રે....... મ,થી....
મારુ હ્રદય વીંધી દે..!
"અનંત"

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