Monday, 18 September 2017

अपने आपको समजाता अनंत ...


Katira Paresh updated his cover photo.
बर्षो पहेले अनंत ने कहा/लीखा था...
मेरी खोज .. मेरी तलास..
वो ही ! हमारे लिए ख़ास हे ! जिनके लिए हम ख़ास हो.!
जब तक वो ना मिले, दूर ही सही, दिलसे मगर पास हो.!
में प्रेमका दरिया नहीं ! झरना हु. फिरभी हु में प्यासा.
उस प्रेमको ढूंढ़ता हु में, जिसे, मेरे प्यारकी प्यास हो.
प्रेम अनंत है अनंत कालसे हे और अनंत काल तक रहेगा.
होगा कही तो तुमको भी चाहने वाला. तुम ना यु उदास हो.
वैसे तो हर लम्हा में अपनी ख़ुशी मस्तीमे जीता हु, तब तक
में उदास नहीं होता, जब तक मेरे बगैर, ना कोई उदास हो.
हां “अनंत” कालसे भटकता हु अज्ञानी की तरहा. में सिर्फ
उसे ही ! खोजता हु. मेरी ही तरहा जिसे सिर्फ मेरी तलास हो.!
“अनंत”
ऐसा नही की कही नही होगी वो.
कही ना कही तो, छुपी होगी वो.
अगर मे उसके बारे मे सोचता हु,
तो मेरे बारेमे भी सोचती होगी वो.
जैसे मे भटकता हु खोजता हु उसे,
इधर. उधर मुजे भी खोजती होगी वो.
"अनंत" जीवनी की इस यात्रा मे जब -
कभी कही मीलेगी तब होगी वोही वो.
"अनंत" भीडमे से पहचानकर.. भीड चीरते हुवे पास-
आकर, जो मुझे सीनेसे लीपट जायेगी वोही होगी वो.
"अनंत "
"अनंत "
*બ્લાસ્ટ*
પહેલા, જુદાઈમાં કેમ જીવવું !.
એ મારગ મને તું ચીંધી દે..!
"અનંત" ! પછી તું તારે,
પ્રે....... મ,થી....
મારુ હ્રદય વીંધી દે..!
"અનંત"
Comments
Darshna Suraj Khud ki talaash se nahi hota haasil kuch
Uski ek muskurahat se khuda haasil hai!!
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Katira Paresh लो , फिर मुझे अनंत का लिखा कोई पुराना शेर याद आगया.... 

उसने लिखा था वर्षो पहेले.... 


वो दिलमे सबसे करीब है... 
पर ये बात बड़ी अजीब है... 

जो करीब है वो दूर है "अनंत"
और जो दूर है वो करीब है... 

ऐसा उसने ना जाने किसके लिए लिखा होगा वोही जाने.... 
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Darshna Suraj Faasle kuch rishto ko chhu nahi paate...baaki nazdikyon ne tode hai dil bahut!!
March 3, 2015 at 11:05pm
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Katira Paresh आपका ये शेर पढ़ते ही में अपने घरके ऊपर वाले कमरे में गया.... 

जहा इक अलमारी में अनंतका लिखा बहोत सारा साहित्य पड़ा है ... 


अच्छा लगता है मुझे , कुछ मोके पर, उसका लिखना पढना और लिखना.... 

तो उनमेसे मुझे एक ये शेर मिला.... 

तो उसने लिखा था..... 

ऐसा भी होता है इस जमाने में... 
ऐसा ही होता था, उस जमाने में... 

आये गए हर वक्त्की तासीर देखके... 

"अनंत" सोचता हु में... 

ना मजा है बहोत दूर जाने में... 
ना मजा है ज्यादा पास आने में... 

"अनंत" सही मजा हे जीवनका. 
जो मिला उसीका लुफ्त उठाने में. 

"अनंत
हां ऐसा उसने बर्षो पहेले बहोत सोचके लिखा था... ! 

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