“અનંત કાળથી ભટકતો અજ્ઞાની” ખંડેર
"અનંત" કાળથી ભટકતો "અજ્ઞાની"
Wednesday, 4 October 2017
अनंत की आत्म कथा ...
और फिर
लोग भरम के भवर में डूबते गए
और मै इश्क में
जब कोई मेरे पास न था ...
में तनहा था ...
अकेला नहीं था ...
कोई नहीं आई हाथ थामने
तब भी मेरी आँखों के सामने ...
वो सब थी ...
जो साथमे तब थी ...
जब में इश्क में डूबा था ...
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