Saturday, 14 July 2018

आधी रात के बात

बर्षो पहले  जब सब चली गई तब अनंत अकेला रहे गया 
और फिर उस तन्हाईमे अनंत ने लिखा था की, 

आधी रात के बाद  कौन आता है यहाँ 
क्यों कोई आये यहाँ  मुझे कहा हे पता 

मेंने तो तन्हाई में जीना शिख लिया है 
अब तो तन्हाई ही मेरी महफ़िल है

ये तन्हाई कहेगी अब मेरी दास्ता 
अब ना मेरा किसीसे कोई वास्ता 

जो चाहा था जिसे चाहा था वो ना मिला 
ओर बसअब में "अनंत" तन्हा भला 
फिर क्यों कोई आये जाये   
फिर क्यों कोई आये जाये   
"अनंत"











વર્ષો પહેલા અનુભવના ઊંડાણેથી ભઈબંધે કહ્યું હતું કે, 
*બ્લાસ્ટ*
કોઈ કોઈ કરે નહીં ,એ વાત નોખી છે "અનંત"
મગર જીવનમાં સૌ ને નાની મોટી ફરિયાદ હોયજ છે !
પોતાના યા પારકા પ્રત્યે !
"અનંત"

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