Monday, 27 May 2019

फिर मुसाफिर निकल गया दूर बहोत दूर


मुसाफिर हु यारो

न घर है न ठिकाना
मुसाफिर हु यारो
न घर है न ठिकाना
मुझे चलते जाना है
बस चलते जाना ।।।
मुसाफिर हु यारो
न घर है न ठिकाना . . .
एक राह रुक गयी
तो और जुड़ गयी
मैं मुदा तो साथ साथ राह मुद गयी
एक राह रुक गयी
तो और जुड़ गयी
मैं मुदा तो साथ साथ राह मुद गयी
हवा के पारो पर मेरा आशियाना
मुसाफिर हु यारो

न घर है न ठिकाना
मुझे चलते जाना है
बस चलते जाना ।।।
दिन ने हाथ ठाम काट इधर बिठा लिया

रात ने इशारे से उधर बुला लिया
दिन ने हाथ ठाम काट इधर बिठा लिया

रात ने इशारे से उधर बुला लिया
सुबह से शाम से मेरा दोस्ताना
मुसाफिर हु यारो

न घर है न ठिकाना
मुझे चलते जाना है
बस चलते जाना ।।।
मुसाफिर हु यारो

न घर है न ठिकाना
मुझे चलते जाना है
बस चलते जाना ।।।
Songwriters: Gulshan Bawra / Sachin Dev Burman / RAHUL DEV BURMAN
Musafir hoon yaaro lyrics © Saregama Music United States, Saregama PLC




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