Tuesday, 10 March 2020

બહાર પણ જેટલું જીવ્યો ભરપુર જીવ્યો હું

બહાર પણ જેટલું જીવ્યો ભરપુર જીવ્યો હું !
"અનંત"અંદર પણ ભરપુર જીવ્યો,જીવું છું..!
વર્ષો પહેલા ભાઇબંધે આવું કાંક કહ્યું  લખ્યું હતું પોતાના માટે 
મગર આજે વર્ષો બાદ એના શબ્દો માં હું જીવું છું !
बोलो हवे...काय के'वु छे...?!
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काल तो नेटना वांके लौचा थया हता...
अने उपरथी आंखमा चीक्कार नींदर...
नै तो हु कै पागल छु के,
के एक ना एक चीतर....
बब्बे वार मुकीने....
जे मारी छेज नही...
कदि मारी थैयज नथी...
अने कदि मारी थवानी पण नथी, एवी..
अक्कलनु परदरशन करू...
एवु हु शु काम करु ले पण..! ( हाथीना दांत )
नै तो,
तिरछी नजरे हु क्यारेय....
हु कोई सामे जोतोज नथी....
अर्थात :- सीधुज सामेज जोउ छु..!
पन नींदरमा नजर बदलाय गै तो,
एमा वांक मारो, एकलानोज,
बधी वखते तो ना होय ने...
क्यारेक थाकनो होय..
क्यारेक घेराती आंखनो होय...
बधी वखते मारो वांक नथी होतो कै...
तोय वांकमा अंते हुज आवु छु...
खबर नै केम...! 😇
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