Sunday, 2 April 2023

વાયડીનો

ए वायडीनो तो हतोज जो के !

वर्शो पहेलानी वात छे !

एक दि' बन्यु एवु 

के ...

शु बन्यु ?

ए मारे नथी के'वु ! 

पण ए बनाव जे पण बन्यो तारे शु एमा !

हु नै कौ एटलै नैयज कौ !

ते दि' आम गुस्से थै एणे एनी चहीतीने ,

जे वात कही 'ती ए ,→_→→_→

→_→आ रही →_→

→_→→_→

हु जो खोटु बोलु तो तु साचु मानी जाय छे !

अने साचु बोलु तो तने माठु लागी जाय छे !

"अनंत" एटले ज हवे हु कशु बोलवानो नथी.

तु लाख प्रयास करे ! हु मो , खोलवानो नथी.

"अनंत"

जो के ए पछी तो ए बंने केटलाय दिवस सुघी ना बोल्या बंनेनु मलवानु ओछु थै ग्यु !

पछी ज्यारे बेउथी एक बीजा वीना 

ना रहेवायु एटले पछी मल्या ! 

पछी  बौ लड्या जगड्या ....

पेलीये तो चींटीयाय खुब भर्या !

पेला ना गाल पर ...

ने पछी ,,,

प्रेम थी जे लडे ,

ए रडे तो खराज ने ! 

ए पण रड्या ....

ब्लास्ट :- 

अंत ए शरुवात समजवी 'अनंत' पछी ते,

प्रेम होय ,वार्ता होय, जीवन हो' के म्रुत्यु !

"अनंत"

जोके ए चीत चोर हतो !

'ने हु चीत्र चोर ....

बस एटलोज फेर ...:)











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