Saturday, 15 April 2023

હું નૈ કૌ

 ઘોઘી આમ તેમ જુવે છે પણ ઘોઘો ક્યાય દેખાતો નથી.


તો ઘોઘો ગયો ક્યાં...? ભટકેલો કદાચ નહાવા ગયો હશે... 


આમ વિચારતી  ઘોઘીની આંખો અંજાય છે . 


અચાનક ઝબકારા જેવુ કશુક થાય છે.  


ઘોઘીનું ધ્યાન રવેશ તરફ જાય છે .. 


બહાર રવેશમાં અજવાળા જેવુ કશુક લબક ઝબક થતું ઘોઘીને દેખાય છે..


ઘોઘી રવેશમાં જઈને જુવે છે તો..... 


धोधो धरमाज छे !


धोधो रवेशमा उभो ऊभो फुलजडी गोल गोल 

फेरवे छे !


धोधी चुप चाप पाछल उभी रही ,

तमासो जुवे छे !


अच्छा तो आ चमकारा नु कारण फुलजडी छे !


धोधी मनोमन बबडे छे !


वगर दीवाली ए दीवाली !!!


नक्की कै नवो कोयडो !


साव अमस्ती तो आवी हरकत धोधो नाज करे!


कैक तो राज छे !


नै तो क्या दीवाली आज छे !


धोधाने खबर नथी के धोधी आवीने  पाछल 


उभी छे , एतो बस एनी मस्तीमा लीन छे !


के पछी गमगीन छे ? खबर नै...


आखरे फुलजडी ठरी गै !


अने धोधो रवेशमाथी धरमा आववा-


पाछु फरे छे !


अने दरवाजाना बंने बारसाखे हाथ आडा दैने उभेली धोधीने जोई चोंकी जाय छे ! 


चहेरा पर गुस्सो घरी 'ने,

झीणी आंख करीने,


धोधी धोधा सामे कतराय छे !


अने बंने वच्चे वीवाद सह संवाद थाय छे !


धोधो :- ओह धोधी तु क्यारे आवी !!!


धोधी गुस्से थ्ईने श्वर पर भार दैने बोली ,


हु वर्शो थ्या आवीने उभी छु तारे द्ववारे !


तो एमा आटला देकारा शु करे छे !


धोधो पण उचा श्वरे बोल्यो,


हु युगोथी तारी राह जोउ छु समजी !


धोधी :- ठीक छे ,हशे हवे ! 


पण एमा आटली राडो शु पाडे छे !


पोतानी राडो कोईने ना संभलाय...


बीजा जरा उंचु बोले तो राडो लागे ! बौ केवाय !


दरवाजाना बंने बारसाखे हाथ राखी दरवाजा-


आडे उभेली धोधीने आधी खसेडी,

धोधो अंदर धुसवा जाय छे , 


तो धोधी धोधानो हाथ पकडीने त्यांज उभो रहेवा फरमान करता कहे छे !


अंदर क्या धुसे छे ! पहेला मने ए कहे धोधा के ,


आ वगर दीवालीए तु दीवाली केम उजवे छे !?


मारी मरजी ! हु गमे त्यारे होली के दीवाली 


उजवु तारे शु ! 

आम कही धोधीनो एक हाथ हडसेली,


धोधो रुममा जै -


घब्ब करतो सोफा पर बेसी ग्यो ...


धोधी पण रुममा जै धोधा सामे बेसी गै ,


धोधाना श्वरमा गुस्सा साथे वेदनानी घ्रुजारी


धोधीए महेसुस करी.धोधी मनोमन वीचारे छे ,


होय ना होय धोधाने भीतर भीतर कैक पीडा खाई रही छे !


धोधी धोधानी आंखमा आ़ख परोवी पुछे छे !


धोधा साचु बैलजे आ वगर दीवालीए फुलजडी 


सलगावी दीवाली उजववानु कारण शु छे !? 


गुस्सामा धोधो एक झाटके साचु बोली ग्यो.


तो शु करु भीतर होली सलगती होय एमा हु दाज्या करु ! 


एना करता तो फुलजडी सलगावी दीवाली 

ना उजवु !


धोधा आम उखाणा ना कर !


मने तारी आ उखाणा जेवी वातो 


उकेलता नथी आवडतु !


धोधो कहे . तो ना उकेल !


धोधी मुजाय छे मनमा वीचारे छे !


अचानक एवु ते शु थयु के ,


धोधो आम आडु बोले छे ! 


जोके सीघु पण क्या क्यारेय बोले छे.


जाणे सीघु बोलता शीख्योज नथी !


धोधी पाणीनो ग्लास भरी-


धोधाने आपता कहे छे , 


धोधा आम तो हु तने  क्यारेय नही उकेली शकु,

 

कांक समजाय एवु बोल यार आमा हु पण गुचवाई जाव छु !


धोधीए आगल घरेलो पाणीनो ग्लास हाथमा-


ना लेता हडसेलो मारी -


धोधाए कहयु मारे पाणी नथी पीवु ! तु पी ! 


अच्छा चाल हु पी जाउ छु बस !


हवे बोल तने शु थयु छे आखरे ,


मारी कोई भुल !


मने ना पुछ हवे ! 


तु खुद याद कर !


तु छेल्ले जता जता तु शु बोली हती !


धोधी वीचारे छे पण कै याद नथी आवतु !


तु ज कहेने धोधा !


मने तो कै याद नथी आवतु के हु एवु ते शु बोली के तारा दीलमा आग लागी !


हु नै कौ तने समजाय तो समज नै तो रेवादे !


क्रमश....

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