"અનંત" કાળથી ભટકતો "અજ્ઞાની"
हर कोई कुछ ना कुछ सौच रहा है।
पुछता नहीं कोई फीर भी बोल रहा है।
पुछता नहीं कोई फीर भी बता रहा है।
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