Wednesday, 22 November 2023

મારાજ ઘરમાં

 મારાજ ઘરમાં હું ગયો હતો મારવા લટાર... 

કૈક અંદર મુકી આવ્યો, લાવ્યો કૈક બહાર.. 

खंडर के अंदर 

और, 

खंडर के बहार

मै और मेरे यार 

कुछ वीचार भीतर 

बहार कुछ वीचार 

होती है बहोत सी बाते.! 

बाते तो बहोत सी होती है। 

लेकीन, 

समने समजाने वाली बाते, 

होती है सीर्फ दो चार... 

मेरी बात और है मे कही। 

आता जाता ही नहीं। 

देखता हु मै सब 

लेकीन 

जो चाहे जब चाहे आये जाये 

ना कोई तकरार ना ही इन्कार 

आके जाने वालो के बाद 

जाके आने वालो का इन्तजार 

मेरा घर है कुछ ऐसा 

जीस मे ना कोई दर है 

और नाही कोई दीवार 

है पुराना पुरा का पुरा 

पुरानी यादों से भरा है। 

फीर भी बीलकुल खाली है। 

और चारो और से है खुल्ला। 

मेरा घर है आर पार 

आज कुछ मेरे और कुछ 

अनंत अज्ञानी के वीचार 

"इन मीन हम तीन" 

"अनंत" 


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