Sunday, 21 April 2024

ईश्क कि गहराई।

 मेरे यारने बर्षो पहेले लीखा था !


"अनंत"ईश्क की गहेराई कीसने नापी है!

ईश्क मे सीर्फ अहेसास -ए -रुह काफी है !


और सब कुछ तो अपने आप हो जाता है !

जींदगी लंबी हे , और वक्त भी काफी है ! 


कहानी अभी अभी तो शुरु हुइ हे.लंबी हे -

कहानी ओर कहानी अभी भी बाकी है !


मै कहेता रहुंगा ,तुम सुनती रहेना.

मेरी कहानी मे तुम बहेती रहेना .


हम तुम खत्म हो जाये कभी ,तब भी !

रुह बोलती रहेगी ,रुह सुनती रहेगी !


अंत नही जीसका कोई ,अनंत ...

ये लंबी कहानी है !

सबको न्ई लगेगी लेकीन , कहानी ये 

सदीयो  पुरानी है !


अनंत रास्ता दुउउउर दुर तलक जाता है ! 

मंजील है ही नही कौन पहोंचना चाहता है !


हम तो मुसाफीर है , सदीयोसे ईस सफर के ,

"अनंत" हमे तो बस चलनेमे मजा आता है ...


लो एक और  पुराना फटा पना आज कम हुवा...

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