हे, वत्सो....
तमे अभण छो....(हु पण)
अकले ज..
भाषामे उलझे हुवे हो।
जब की मेरा यार्र "अनंत" कैता था की,
सबसे अच्छी भाषा कौनसी है
तुम क्या जानो अरी ओ नादान
सबसे बहेतर सबसे प्यारी
और जो समज शके या समजना चाहे
उसके लीये बहोत आसान
भाषा जो है वो भाषा प्रेम की है
और वो,
दील ही मे दील ही से लीखी जाती है
आंखो मे आंखो से देखी पढी जाती है
और "अनंत" रूह मे रूह से
सुनी समजी और महेसुस की जाती है.
"अनंत "
आवु भाईबंधे वर्षो पे'ल्ला एनी कोई
पे'ल्ली बीजी के त्रीजी चहीती ने कहेलु.
ए पे'ल्ली बीजी के त्रीजी चहीती कै हती
ए मन खबर नथ
जो के ह्रदय पत्थर होय तो तकलीफ
ने आंखे शश्मा होय तोय तकलीफ
शश्मा आडा आवे स्साल्लु मारे वांचवु केम ?
के कोईनी भीतर छे के नै छे तो छे केटलो प्रेम।
एम तो मारेय ट्यूशननी जरुर छे,
पण कोई राखवा तैयार नथ ले पण...
"અનંત" એ તમામે તમામ અભણ છે.
જે પવિત્ર પ્રેમની ભાષા નથી જાણતા.
"અનંત" એ તમામે તમામ અભણ છે.
જે પવિત્ર પ્રેમની ભાષા નથી સમજાતા.
*બ્લાસ્ટ*
તે પણ, તમે પણ, "અનંત હું પણ.!
આખરે એ તમામે તમામ છીએ અભણ.!
" અનંત "પ્રેમ ની ભાષા જે સમજે નહીં..
એ તમામે તમામ અભણ છે.!
" અનંત "
" અનંત "
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