Sunday, 12 January 2025

फीर मेरा वांक नै काढना..


તો પછી ,
સવાલો કેમ કરો છો...?
અગર જો જવાબો સાંભળવાનું 
જીગર ન હોય ...
હું એમ કૌ છું ..!
गुलाब दास की रचना 
*ब्लास्ट*
"गुलाब" आंखो मे क्या झांकते हो। 
आंखे फरेबी भी हो शकती हे।
झांकना है तो दिलमे झांको। 
जहां से प्यार की लहेरे उठती है। 
"गुलाब दास" 


*ब्लास्ट*
"अनंत" फीर मेरा वांक नै काढना... 
गर डूब जाओ तूम देखते देखते..

"गुलाब" आंखो में क्या झांकते हो। 
आंखे फरेबी भी हो शकती हे।
"गुलाब" 


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