તો પછી ,
સવાલો કેમ કરો છો...?
અગર જો જવાબો સાંભળવાનું
જીગર ન હોય ...
હું એમ કૌ છું ..!
गुलाब दास की रचना
*ब्लास्ट*
"गुलाब" आंखो मे क्या झांकते हो।
आंखे फरेबी भी हो शकती हे।
झांकना है तो दिलमे झांको।
जहां से प्यार की लहेरे उठती है।
"गुलाब दास"
*ब्लास्ट*
"अनंत" फीर मेरा वांक नै काढना...
गर डूब जाओ तूम देखते देखते..
"गुलाब" आंखो में क्या झांकते हो।
आंखे फरेबी भी हो शकती हे।
"गुलाब"
https://www.facebook.com/share/15bZ9cuuJQ/
https://www.facebook.com/share/p/18Ny27J3GK/
https://www.facebook.com/share/p/15x9afKyej/

No comments:
Post a Comment