નોખા નોખા ફુલોની ખુશ્બુ પણ નોખી નોખી હોય છે.
મગર "અનંત" પ્રેમની ખુશ્બુ સૌથી અનોખી હોય છે.
"અનંત"
फिर छिड़ी रात, बात फूलों की
रात है या बारात फूलों की
फूल के हार, फूल के गजरे
शाम फूलों की, रात फूलों की
फिर छिड़ी रात...
आपका साथ, साथ फूलों का
आपकी बात, बात फूलों की
फिर छिड़ी रात...
फूल खिलते रहेंगे दुनिया में
रोज़ निकलेगी बात फूलों की
फिर छिड़ी रात...
नज़रें मिलती हैं जाम मिलते हैं
मिल रही है हयात फूलों की
फिर छिड़ी रात..
ये महकती हुई ग़ज़ल मखदूम
जैसे सहरा में रात फूलों की
फिर छिड़ी रात...
Movie/Album: बाज़ार (1982)
Music By: खैय्याम
Lyrics By: मखदूम मोहिउद्दीन
Performed By: लता मंगेशकर, तलत अज़ीज़
https://youtu.be/meif1oIfJ5o?si=AsG6Unue7FqnUpL0
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