शर्दी का मौशम सड़क सुमसान गली सुनी,
चारो और अँधेरा घना अँधेरा ...
मै महोल्ले की और चला चाय ले कर हमेशा की तरहा.
आज मेरे हाथ में टोर्च थी.
क्यों की आज में अकेला न था मरे साथ कोई और भी था जिसे.
अंधेरो से उसे डर ना लगे इस लिए मैने साथ में टोर्च ली थी.
हां मेरे साथ थी एक लड़की, जो अनंत को मिलना चाहती थी.
कई दिनों से वो अनंत अनंत की रट लगा रखी थी बहोत बहाने बनाए .
पर अब तो वो जान पे बनी और मै मजबूर हो गया .
ये दूसरी लड़की थी जो पागल बनी थी अनंत को मिलने के लिए .
इससे पहेले भी मुझे ऐसे ही मजबूर किया गया था..!
नहीं मिलाता तो दोस्ती तोडने की धमकी.
आज भी ऐसा ही हुवा फिर ना मिलने की धमकी .
सो आज में उसे अनंत से मिलाने मेरे साथ खंडर पर लाया.
उसकी इच्छा थी इस महेफिलमे आने की .
मै महोल्ले में गया दरवाजा हमेशा की तरहां खुल्ला था .
"आप बहार खड़े रहे मुझे उनसे पूछना होगा."
मै अंदर गया . अनंत और अज्ञानी आमने सामने बैठे थे ..
टीपॉय पर मॉम बती जल रही थी ...
आव आव परिया आव् बैठ और ,
जल्दी से चायकी प्याली भर दे यार ...
आज बहोत भारी ठंड हें सो चाय पिए तो,
भीतरसे जिस्म थोडा गर्म हो जाए .
फिर महेफिल का मजा आये ...
मेरी खुर्शी खाली मै ने अपनी कुर्शी संभालते हुवे ...
हां चाय तो मै भरता हु पर आज एक पियाली और ले आ अनंत .
अनंत ने मुझे पूछा .
क्यों परिया एक और पियाली ? बहोत ठंड लग रही है तुजे ?
जो तु दो दो पियाली चाय पिएगा ?
अज्ञानी बोला अरे भई ठंड लगी भी है तो,
भले ही दो बार चाय पिए उसमे क्या हें .
अनंतने कहा ,पर यार दूसरी पियाली की क्या जरुरत ..!
दो बार एक ही पियाली में चाय नहीं पी शकता क्या ?
मैने कहा अरे यारो ऐसी बात नहीं है ?
अनंत बोला फिर कैसी बात है बता ?
मैने दोनों के सामने देखते हुवे अनंत को धीरेसे कहा,
आज तुजे कोई मिलना चाहता है .
अनंत बोला क्यों ?
मुझे क्यों मिलना चाहता है ?
और कौन मिलना चाहता हें मुझे परिया ?
अनंत ने एक ही साँस में दो सवाल पूछ लिए.
मैने कहा एक लड़की है जो तुजे मिलना चाहती है.
लड़की ! ? उसे तो एक बार मै मिल चूका हु अब क्या है ?
अरे यार ये वो नहीं दूसरी है कई दिनों से तेरे बारे में पूछ रही थी .
मैने अनंत के सामने टोर्च का उजाला फेंकाते हुवे कहा ...
अनंत ने अपनी आँखों पर हथेली रखते हुवे चिल्लाके कहा परिया ...
तु टोर्च बंध कर मुज पर प्रकाश मत डाल..!
हटाले मेरे चहेरे के सामने से ये उजाला ,
मुझे अँधेरे में ही रहे ने दे ...
पर अनंत तुजे कोई मिलने आई है .. .
जो तेरी लिखावट को तेरी सौच को पसंद करती है .
नहीं अब मुझे किसी से नहीं मिलना मिल चूका बहोत को ...
पर यार तु समजता क्यों नहीं . मैने उसे समजाते हुवे कहा ..
वो बोला नहीं परिया मुझे किसीसे नहीं मिलना ...
जब सामने था तब तो मेरा हाल तक नहीं पूछा किसीने ...
जब "अनंत" छुप गया तो लोग ढूंढने निकल पड़े है मुझे ..
अनंत के मुहसे दर्द भरा शेर निकल गया ..
फिर वो बोला परिया ...
अब वक्त गुजर चूका ....
जो जब मिलना चाहिए तब नहीं मिला .....
अब कोई मिले भी तो क्या ना मिले भी तो क्या ...
अज्ञानी बोला यार तु कभी चाहता था की नहीं की.
तुजे कोई ऐसी लडकी मिले जो,
तेरे जझबात-ओ लाब्झो को समजे चाहता था ना ?
मैने अज्ञानी की बात में सुर मिलाते हुवे कहा.
हां अनंत मै भी तुजे कहेता था याद है की ,
एक ना एक दिन तुजे ऐसी लड़की मिलेगी
जो तेरे दिलके हालत को खूब समजेगी ...
अनंत ने कहा हां वो सब ठीक है, सही हें,
पर तुम दोनों भी जानते हो ना मेरे साथ जुड़ने वालोको
मुझसे जुड़ने के बाद सिवाय आंसु के कुछ नहीं मिलता .
और मै किसीको अब रुलाना नहीं चाहता ..
मेरे हाले दिल अब ठीक है फिर क्यों ,
किसको पुरानी यादो में घसीट के हम दु:ख दे ,
पहेले भी इस कदर तु जिसे लाया था उसे में तेरे कहेने पर मिला ..
क्या हुवा क्या कुछ बात बनी अरे यार वक्त निकल चूका है ...
वो चाहते हुवे भी मेरे पास नहीं आ शकती ...
और में भी आझाद कहा ...
सब अपने अपने रिस्तो में उल्जे हुवे है बंधे हुवे है...
वो भी ना आई ये भी ना आ शकेगी सारे के सारे बांधे हुवे है ...
कोई आझाद नहीं रहा तु समजता क्यों नहीं परिया ...
अनंत गुस्सा हो गया ...
अब जिसे मिलना हो वो अगले जनम तक इन्तजार करे बस...
मैने अनंत को समजाने की कोशिश की ...
पर...एक बार मिल तो ले फिर चाहे ना मिलना कभी ..
उसे कहे दो बहोत हुवा अब बस भी करो.
जो मर चूका है , उसे फिर ज़िंदा ना करो.
मिलेगा क्या आखिर उसे या मुझे तु बता .?
फिर प्यार, फिर जुदाई,
आंखो में आंसु
फिर तड़प फिर उदासी.
ये सब फिर आये जीवन में ऐसा ना करो,
जो मर चूका है उसे फिर ज़िंदा ना करो.
अब तो प्यार के नाम से ही हम डरे है .
बड़ी मुश्किल से गहेरे झख्म भरे है .
उन झ्क्मो को अब फिरसे हरा ना करो.
जो मर चूका है उसे फिर ज़िंदा ना करो.
तुम क्या जानो.
कितना सताया हें इश्कने मुझे
बहोत सताया है इश्क ने मुझे .
बहोत रुलाया है इश्कने मुझे.
अश्क फिर आखो में आए ऐसा ना करो.
जो मर चूका है उसे फिर ज़िंदा ना करो.
सच्चे प्यारकी खोजमे आधी उम्र कट चुकी है
अब जिंदगी हमारी कितने हिस्सोमे बट चुकी है.
हो कोई और भी परेशा हमारी कारन.
ना में करू ना तुम भी ऐसा गुनाह करो.
"अनंत"अब मिलना इतना आशा नहीं हें,
ये जीवन भी तो अब सिर्फ हमारा नहीं हें .
मै तो संभल रहा हु तुम भी संभल जावो.
यु रोज रोज हमसे तुम मिला ना करो.
जो मर चूका है उसे फिर ज़िंदा ना करो.
"अनंत"
अनंत ने अपनी रचना के जरिये सारी बात कहे दी ...
हम भी समज चुके थे की ,
अब अनंत को समजाने की कोई गुंजाइश नहीं थी .
हमारे तीनों की आँखे नम थी ...
तो अब क्या सोचा अज्ञानी ने अनंत से पूछा ...
अनंत ने स्पष्ट कहे दिया , नहीं मिलना ...
पर बस थोड़ी देर के लिए मैने डरते डरते अनंत से कहा.
मेरी खातिर एक बार उसे मिल लो यार,...
मैने उनसे वादा किया है...
मेरी हालत पतली देख अनंत थोडा मुश्कुराया .
फिर बोला .
ठीक है तु कहेता है तो तेरी खातिर .
पर उसे कहे देना इसके बाद कभी नहीं.
हां हां ठीक है जैसा तु कहे पर एक बात और बतादे ,
हां बोल परिया ..
मेने कहा, अगर फिर उसे मै मिलता रहू,
तो तुजे कोई एतराज तो नहीं ना ?
नहीं मुझे बिलकुल एतराज नहीं पर तुजे भी संभलना होगा .
जुड़े ना जुड़े रिश्ते जिश्म्के ,रूह्का रिश्ता टूटना नहीं चाहिए ..
हां हां में सब समज गया तो क्या में उसे अंदर बुलाऊ ..
हां बुलालो ...