Wednesday, 31 December 2014

અનંતની રચનાઓ માંથી ....

दुनिया..

क्या दुनिया बदल गई..?
नहीं ! दुनिया बदली नहीं.

बदले हे लोग बदली हे सोच.
“अनंत” दुनिया हे वही की वही.   

बदलाव...

पहेले सच पे दुनिया चलती थी.
और जूठ से दिनिया जलती थी.

अब जूठ पे दुनिया चलती है.
और सच से दुनिया जलती है.

“अनंत” बदला हुवा ये नया आयाम है.


सच कहेता हु जूठ पे दुनिया कायाम है.

“अनंत” 

  

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